अहिल्याबाई होल्कर के बारे में जानकारी 2021 | Ahilyabai holkar information in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में अहिल्याबाई होल्कर के बारे में बताने वाले हैं अर्थात आज का हमारा विषय है ahilyabai holkar information in hindi। अहिल्याबाई होल्कर का नाम कई लोगों ने पहली बार सुना होगा और कईयों को इनके बारे में कुछ information पता होगी लेकिन संपूर्ण जानकारी ना होने की वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि information about ahilyabai holkar in hindi , ahilyabai holkar full information in hindi

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अहिल्याबाई होल्कर के बारे में जानकारी | Ahilyabai holkar information in hindi | information about ahilyabai holkar in hindi

INFOGYANS

अहिल्या बाई का जन्म 21 मई 1725 में चौड़ी गांव में हुआ था। वर्तमान समय में अहमदनगर जिले के जामखेड़ में पड़ता है। अहिल्या भाई जब 10 वर्ष की थी तब उनका विवाह कर दिया गया लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि जब वह 19 वर्ष की हुई तब वह विधवा हो गई थी।

उनके पति स्वभाव से चंचल और उग्र उसके पश्चात भी अहिल्याबाई ने यह सब कुछ सहा। अहिल्याबाई जब 43 वर्ष की थी तब उनका पुत्र मालेगांव का देहांत हो गया।

अहिल्याबाई अपने राज के बाहरी सीमाओं पर भी पूरे भारत भर में बहुत सारे तीर्थ स्थान एवं मंदिर बनवाए। कई घाट बनवाए कुओं का निर्माण कराया, यात्रियों के लिए मार्ग बनवाएं और उन मार्गों का पुनः निर्माण करवाया जो खराब हो चुके थे भूखों के लिए अन्न सत्र खोला। अहिल्याबाई आत्म प्रतिष्ठा को त्याग कर अपने पूरे जीवन काल में न्याय करने का प्रयत्न करती रही।

इंदौर में भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी के दिन अहिल्या उत्सव मनाया चला आ रहा है। अरे भाई जब पूरे भारत की यात्रा पर गई थी तब ग्राम उप दी के पास स्थित कस्बे अकावल्या के पाटीदार को अपना राजकाज सौंप दिया।

अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर निर्माण एवं अन्य धर्म कार्यों के लिए अंधाधुंध खर्च किया जिस वजह से नए ढंग से सेनाओं को संगठित ना कर पाए और ऐसा भी कहा जाता है कि तुकोजी होलकर की सेना को अर्थ संकट झेलना पड़ा जब वह उत्तरी अभियानों में थे।

तुकोजीराव होलकर लोगों को ऐसा दिखलाता था कि वह पैसे से बहुत तंग है क्योंकि उसके पास जब 1200000 रुपए थे तब हुआ अहिल्याबाई से रुपए की मांग पर मांग कर रहा था।

अहिल्याबाई के संबंध में दो प्रकार की विचारधाराएं फैली हुई है उनमें से एक थे कि उनको देवी के अवतार की पदवी दी गई है। और दूसरी यह थी कि उनके गुणों के साथ-साथ अंधविश्वास और रूढ़ियों के प्रति भाव किया गया है।

अहिल्याबाई एक सामान्य परिवार से ही थी । लेकिन उनकी शादी एक मालवा के राजकुमार से हो गई क्योंकि एक बार मालवा के राजकुमार राजा मल्हार राव होलकर अहिल्याबाई के गांव से गुजर रहे थे उनको पुणे जाना था लेकिन वह कुछ समय के लिए उनके गांव में ठहर गए और मल्हार राव के पिताजी की नजर अहिल्याबाई पर पड़ी जो भूखे बच्चों को खाना खिला रहे थी।

छोटी सी बच्ची के मन में दया और मानवता देखकर मल्हारराव के पिता ने अहिल्या का रिश्ता अपने पुत्र से बात की और अहिल्याबाई की शादी राजघराने में हो रही थी जिस वजह से उनके पिता ने शादी के लिए हां कर दी और मल्हार राव के बेटे खंडेराव की शादी अहिल्याबाई के साथ हो गई।

खंडेराव की मृत्यु कुंभार युद्ध के दौरान हो गई थी सन 1754 में उसके पश्चात उनके पिताजी मल्हार राव होलकर 1766 में मृत्यु हो गई। मल्हार राव का शासन मालवा से लेकर पंजाब तक फैला हुआ था मल्हार राव की मृत्यु के बाद अहिल्याबाई होल्कर मालवा साम्राज्य के राजपाट को संभाला और वहां की रानी बनी उनको सम्मान में राजमाता का कर पुकारते थे।

अहिल्याबाई ने इंदौर के शहर को एक बहुत ही खूबसूरत शहर बना दिया। अहिल्याबाई होलकर का इतिहास करीब 30 साल के अंतर्गत इंदौर के एक छोटे से शहर को बहुत ही समृद्ध और विकसित बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और इसी वजह से आज वर्तमान समय में इंदौर शहर में बहुत ही विकसित शहर है।

एक विनम्र और उदार शासक थे उनके अंदर असहाय व्यक्तियों के लिए परोपकार की भावना भरी हुई थी। अहिल्याबाई ने अपने राज्य के प्रति खुद को पूरी तरह से समर्पित कर दिया था अहिल्याबाई प्रजा और गरीबों की भलाई के लिए बहुत सारे कार्य की है जिस वजह से वह एक महान शासक के रूप में विराजमान थी।

इनके पति खंडेराव होलकर के इनके अलावा तीन पत्नियां और भी जिनका नाम पाराबाई पीताबाई सूतराबाई था। अहिल्याबाई एक ऐसी महिला थी जो गरीबों के प्रति उनके दिल में बहुत सद्भावना थी उन्होंने भूखे लोगों के लिए कई कार्य किए और गरीब व्यक्तियों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे जिस वजह से वह एक बहुत ही महान शासक के रूप में निकल कर आई मराठा साम्राज्य में शादी होने के पश्चात बहुत सारे भार आ गए थे जिनमें से कुछ भार अपनों के खो जाने का वियोग था।

अहिल्या बाई की मृत्यु चिंता और भार के कारण हुई। अहिल्या बाई की मृत्यु 13 अगस्त 1795 में हुई थी अहिल्या बाई की मृत्यु के बाद महाराजा तुकोजी राव मालवा साम्राज्य का शासक संभाला।

अहिल्याबाई होलकर का नाम हमारे पूरे भारत देश में बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है और वर्तमान समय में कई सारी पुस्तकों के अंदर इनका वर्णन किया हुआ है। उत्तराखंड की सरकार द्वारा अहिल्याबाई होलकर भेड़ बकरी विकास योजना चलाई जा रही है इस योजना के तहत भेड़ बकरी पालन योजना के तहत लोगों को रोजगार दिलाया जा रहा है अहिल्याबाई होलकर को पूर्ण सम्मान दिया जाता है।

अहिल्याबाई होलकर ने तुकोजीराव होलकर को सेनापति बना दिया और उनको चावल वसूल करने का कार्य दे दिया गया तुका जी राव की आयु अहिल्याबाई से बड़ी थी परंतु तुका जी राव अहिल्याबाई को अपनी मां के समान ही मानते थे और वह अपने राज्य का पूरा कार्य बहुत ही ईमानदारी और लगन से किया करते थे जिस वजह से अहिल्याबाई तुकोजीराव को अपना पुत्र ही मानती थी।

अहिल्याबाई होलकर भेड़ बकरी विकास योजना के तहत किसानों को जो गरीब है उनको राशन कार्ड एवं बकरी पालन यूनिट कि कुछ राशियां प्रदान कराई जाती हैं।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको इस ब्लॉग में लिखकर बताया ahilyabai holkar information in hindi। अगर आप को यह विषय पसंद हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यदि आपका कुछ सवाल है तो आप हमें कमेंट में पूछ सकते हैं।

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