अल्बर्ट आइंस्टाइन जी के बारे में जानकारी 2021 | Albert einstein biography in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में अल्बर्ट आइंस्टाइन के बारे में बताने वाले हैं अर्थात आज का हमारा विषय है albert einstein biography in hindi। कई सारे लोग को ने अभी तक अल्बर्ट आइंस्टाइन का नाम भी नहीं सुना है जिस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि biography of albert einstein in hindi , albert einstein biography in hindi pdf इसलिए मैं आज आप को उनके बारे में बताऊंगा।

तो चलिए शुरू करते हैं।

अल्बर्ट आइंस्टाइन के बारे में जानकारी | Albert einstein biography in hindi | biography of albert einstein in hindi

INFOGYANS

अल्बर्ट आइंस्टाइन का जन्म 14 मार्च 1879 में जर्मन साम्राज्य में हुआ था इनके पिता का नाम हरमन आइंस्टीन था तथा उनकी माता का नाम पॉलिन आइंस्टीन था। आइंस्टाइन के पिता एक इंजीनियर और सेल्स मंत्र तथा इनकी मां हाउसवाइफ थी शुरुआती दौर में आइंस्टाइन बोलने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था लेकिन वह पढ़ाई में भी अच्छे नहीं थे उनकी मातृभाषा जर्मनी थी इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी और इतालवी भाषा को सिखा।

आइंस्टाइन का पूरा परिवार सन 18 सो 80 में म्युनिख शहर आ गया जहां पर आइंस्टाइन अपने पिता और चाचा के साथ मिलकर इलेक्ट्राटेक्निक फ्रैबिक जे आइंस्टीन एंड सी नामक एक कंपनी शुरू की जिनका काम बिजली के उपकरण बनाना था।

आइंस्टाइन का परिवार यहूदी धर्म से था लेकिन वह इस धार्मिक परंपराओं को नहीं मानते थे जिस वजह से आइंस्टाइन कैथोलिक विद्यालय में पढ़ा करते थे आइंस्टाइन अपनी माता से सारंगी बजाना सिखा उनको यह पसंद नहीं था जिस वजह से कुछ दिन पश्चात उन्होंने इसे बजाना छोड़ दिया।

सन 18 सो 94 में इनकी कंपनी म्यूनिख शहर में विदेश प्रकाश की व्यवस्था की आपूर्ति न कर पाने की वजह से इनको इस व्यापार में काफी नुकसान उठाना पड़ा जिस वजह से इनको अपनी कंपनी बेचनी पड़ी और उनका पूरा परिवार उस व्यापार को बेचकर इटली ने व्यापार की तलाश में चला गया लेकिन आइंस्टाइन अभी भी म्यूनिख में रुक कर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे थे और उनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद यह अपने परिवार से मिलने के लिए इटली गए उस दौरान आइंस्टाइन एक निबंध लिखा था जिसका शीर्षक एक चुंबकीय क्षेत्र में इथर की अवस्था की जांच दिया था।

आइंस्टाइन जब 16 वर्ष के थे तब उन्होंने स्विस फेडरल पॉलिटेक्निक स्कूल में दाखिला लेने के लिए प्रवेश परीक्षा दी थी लेकिन वह सामान्य भाग में भी आवश्यक मानक तक नहीं पहुंच सके लेकिन उनके भौतिक विज्ञान और गणित में बहुत ही अच्छे ग्रेड आने की वजह से उस स्कूल के प्रिंसिपल की सलाह पर उन्होंने स्विट्जरलैंड के आरो मैं आर्गोवियन केंटोनल स्कूल मैं मैं अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के लिए दाखिला कराया इनके स्कूल के प्रोफेसर जोस्ट विन टेलर इनके परिवार के साथ रहते थे इसी दौरान आइंस्टाइन को इनकी बेटी मैरी से प्यार हो गया।

अल्बर्ट आइंस्टाइन महात्मा गांधी से बेहद प्रभावित थे जिस वजह से वह एक दूसरे को लिखित पत्र का आदान प्रदान किया करते थे अल्बर्ट आइंस्टाइन ने महात्मा गांधी को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में बताया है आइंस्टीन एक ऐसे व्यक्ति थे जो ईश्वर में विश्वास नहीं रखते थे लेकिन वह खुद को नास्तिक भी नहीं बताते थे लेकिन उनका यह मानना था कि यह सभी सिर्फ हमारी सोच है।

सन उन्नीस सौ मैं आइंस्टीन के पहले शोध पत्र जिसका नाम कोशिका आकर्षण था यह सन उन्नीस सौ एक में के केशिकत्व घटना के निष्कर्श नाम से प्रकाशित की गई। सन उन्नीस सौ दो और 1903 में परमाणु घटना की व्याख्या सांख्यिकी के माध्यम से करने की प्रयास से दो पत्रिकाएं प्रकाशित की गई यही पत्र सन उन्नीस सौ पांच में ब्राउनियन गति के शोध पत्र के लिए नीव बनी।

अल्बर्ट आइंस्टाइन की क्वांटम थिअरी जिसमें उन्होंने फोटोन रचना की थी।इसके अलावा इस टाइम एक बहुत ही प्रसिद्ध फार्मूला दिया जो भौतिक विज्ञान को पूरी तरह से बदल कर रख दिया उन्होंने इज E=MC square फार्मूले दिया जो द्रव्यमान और ऊर्जा के बीच के समीकरण को प्रमाणित करता है वर्तमान समय में आज उसका उपयोग nuclear urja स्वरूप किया जाता है।

अल्बर्ट आइंस्टाइन कई सारी थ्योरी दिया है जो वर्तमान समय में पूरे भौतिक विज्ञान को बदल कर रख दिया है विज्ञान विषय को पढ़ने वाले सभी बच्चों को इनके द्वारा दिए गए समीकरण एवं थ्योरी पढ़ने पड़ते हैं। आइंस्टाइन के बारे में कई सारी ऐसी बातें भी है जो आपको आश्चर्यचकित कर देंगे।

आइंस्टाइन का दिमाग बचपन में एक साधारण बच्चे से भी कम था वह किसी भी बात को याद कर नहीं पाते थे लेकिन फिर उन्होंने अपने दिमाग की शक्ति से ही किसी भी प्रयोग का हल निकालने में सक्षम अपने दिमाग को बनाया

आपको हम बता दें कि अल्बर्ट आइंस्टाइन की मृत्यु के बाद किसी वैज्ञानिक ने उनके दिमाग को चुरा लिया और 20 वर्षों तक उसे जार में बंद करके रखा। अल्बर्ट आइंस्टाइन को नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ है लेकिन हम आपको बता दें कि उसकी राशि उनको प्राप्त ना हो सकी अल्बर्ट आइंस्टाइन को राष्ट्रपति के पद के लिए भी चुना गए थे।

अल्बर्ट आइंस्टाइन की आंखों को भी निकाल कर सुरक्षित रखा गया है। उनका ऐसा भी मानना था कि अभ्यास ही सफलता का मूल मंत्र है इसके सिवा कोई भी शॉर्टकट एवं अन्य रास्ता नहीं है।अल्बर्ट आइंस्टाइन को 1921 में बल पुरस्कार दिया गया था तथा उसी वर्ष उनको मत्तयूक्की मेडल भी दिया गया।

सन 1925 में इनको कोपले मेडल दिया गया तथा सन् 1929 में इनको मैक्स प्लांट मेडल से सम्मानित किया गया। सन 1999 उनको शताब्दी के टाइम पर्सन का भी पुरस्कार दिया गया।अल्बर्ट आइंस्टाइन को जर्मनी छोड़कर अमेरिका के न्यूजर्सी में आकर रहना पड़ा क्योंकि जर्मनी में हिटलर शाही होने की वजह से वहां पर ना रह सके और वहां पर आने पर ही 18 अप्रैल 1955 में उनकी मृत्यु हो गई।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको इस ब्लॉग में लिखकर बताया albert einstein biography in hindi। अगर आपको इनके बारे में जानकारी अच्छा लगा हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यदि आपका कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं हम आपके द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब अवश्य देंगे।

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