भगत सिंह के बारे में जानकारी 2021 | Bhagat Singh Information In Hindi

दोस्तों आज हम आपको बताने वाले हैं भगत सिंह के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है bhagat singh information in hindi। भगत सिंह का हम सभी लोग जानते हैं लेकिन कुछ ऐसी बातें हैं जो हम सभी को जाना बेहद जरूरी है क्योंकि गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं कि जैसे कि information about bhagat singh in hindi , information on bhagat singh in hindi इसलिए मैं आज आपको इसके बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाला हूं।

तो चलिए शुरू करते हैं

भगत सिंह के बारे में जानकारी | Bhagat Singh Information In Hindi | information about bhagat singh in hindi

भगत सिंह के बारे में जानकारी 2021 | Bhagat Singh Information In Hindi

भगत सिंह का जन्म 24 सितंबर 1906 हुआ था ऐसा हम सभी को पता है अर्थात ऐसा ही हर जगह पर प्रचलित है लेकिन अभी कुछ सापेक्ष ओ के अनुसार उनका जन्म 27 दिसंबर 1907 में हुआ था। वह एक सिख परिवार में पैदा हुए थे।

हमारे शूरवीर भगत सिंह के पिता का नाम किशन सिंह और उनकी माता का नाम विद्यावती कौर था। भगत सिंह एक किसान परिवार से थे अर्थात वाह किसान परिवार में जन्मे थे लेकिन जलियांवाला बाग हत्याकांड जो सन १३ अप्रैल १९१९ मैं हुआ उनसे उनके मन पर बहुत प्रभाव पड़ा और उनकी सोच में परिवर्तन आने लगे।

चौरी चौरा हत्याकांड सन सन 1922 में हुआ था जिसमें महात्मा गांधी ने किसानों का समर्थन नहीं किया जिस वजह से भगत सिंह के मन पर और अधिक प्रभाव पड़ा और उन्होंने यह ठान लिया कि अहिंसा से हमारे देश को आजादी नहीं मिलेगी सशस्त्र क्रांति ही इस देश को आजाद कराने का एकमात्र रास्ता रह चुका है जिस वजह से उन्होंने महात्मा गांधी का संगठन छोड़ दिया और एक हिंसा वादी संगठन के लिए सुभाष चंद्र बोस के संगठन में चले।

उन्होंने जलियांवाला हत्याकांड के बाद से अपनी पढ़ाई छोड़ कर नौस्वराज्य भारत सभा की स्थापना की। जब काकोरी कांड हुआ तब उसमें राम प्रसाद बिस्मिल के साथ अन्य 4 लोगों को फांसी दे दी गई और 16 क्रांतिकारियों को कारावास में डाल दिया गया जिस वजह से भगत सिंह बहुत ज्यादा उद्विग्न हुए और उन्होंने यह निश्चय किया कि अब वह चंद्रशेखर आजाद के द्वारा संगठित किए गए संगठन जिसका नाम हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन था उससे जुड़ गए और उसके पश्चात उन्होंने उस एसोसिएशन का नाम बदलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन कर दिया जिसका यह कार्य था कि वह पीड़ा झेल रहे युवाओं को संगठित करें।

राजगुरु के साथ मिलकर भगत सिंह ने सन १७ दिसम्बर १९२८ मैं एक अंग्रेज अधिकारी जिसका नाम जे० पी० सांडर्स था उसे मार दिया। जब जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था तब भगत सिंह की आयु 12 वर्ष की थी लेकिन जब उनको इस बात का पता चला कि जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ है तब वह अपने स्कूल से 12 मील दूर जलियांवाला बाग तक पहुंचने के लिए पैदल चलकर गए थे। भगत सिंह 12 वर्ष की आयु में अपने चाचा के क्रांतिकारी कार्यों की बुक पढ़ा करते थे और यह सोचते थे कि उनके द्वारा किया जाने वाला यह कार्य सही है या नहीं।

हमारे बापू महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन चढ़ने के बाद भगत सिंह उस आंदोलन में सम्मिलित हुए और क्रांतिकारी और अहिंसा के बीच का रास्ता अपनाया लेकिन जब असहयोग आंदोलन रद्द कर दिया गया तब भगत सिंह को बहुत ही अधिक गुस्सा आया और वह रोष में थे लेकिन उन्होंने महात्मा गांधी को कुछ भी नहीं बोला क्योंकि वह अपने राष्ट्र की तरह उनकी भी इज्जत और सम्मान किया करते थे लेकिन उन्होंने अपने मन में यह विचार कर लिया कि अब उन्हें हिंसात्मक क्रांतिकारी के मार्ग पर चलना है क्योंकि एक वही एक ऐसा रास्ता है जो हमारे देश को आजादी दिला सकता है।

इसके पश्चात भगत सिंह कई जुलूस में शामिल होना शुरू कर दिया और कई दलों में सम्मिलित हो गए जिस वजह से हुआ है एक हिंसात्मक क्रांतिकारी के मार्ग पर चल सके और उनके दलों में मुख्य क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद सुखदेव और राजगुरु थे।

भगत सिंह शादी नहीं करना चाहते थे और जब उनके घर परिवार और माता-पिता द्वारा शादी करने का दबाव उन पर डाला गया तब उन्होंने अपने घर और परिवार को छोड़कर कानपुर चले गए और उन्होंने यह भी कहा कि मैं इस गुलाम भारत में शादी नहीं करूंगा यद्यपि मैं शादी करूंगा तो मेरी वधू सिर्फ मौत होगी।

भगत सिंह लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए एक साजिश रची और उनके साथ सुखदेव जी भी मिले हुए थे और उन्होंने जेम्स स्कॉट मारने की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन एक छोटी सी गलती की वजह से उन्होंने दूसरे अधिकारी को मार दिया।

भगत सिंह एक सिख परिवार से थे जिस वजह से भगत सिंह की दाढ़ी और उनके बाल बहुत ही अधिक महत्वपूर्ण थे लेकिन उन्होंने उसकी परवाह न करते हुए दाढ़ी और बाल को कटवा दिया ताकि वह अंग्रेजों द्वारा पकड़े ना जाए और अंततः वह लाहौर से भागने में कामयाब हो गए थे।

भगत सिंह एक बहुत ही बड़े शूरवीर थे जिनको वर्तमान समय में हर कोई जानता है सभी बच्चों को उनके बारे में पूर्णता जानकारी दी जाती है क्योंकि हमारे भारत देश को आजाद कराने के लिए उन्होंने बहुत सी कठिनाइयों का सामना किया है।

भगत सिंह हमारे देश को आजाद कराने के लिए 2 साल तक जेल में रहे लेकिन जेल में रहते हुए भी वह अपना कार्य बंद नहीं किए थे वहां पर भी वह पत्र और पुस्तक लिखकर लोगों को भेजते थे उनका यह मानना था कि जो मजदूरों और किसानों का शोषण करता है चाहे वह भारत ही देश का क्यों ना हो वह सभी उनका दुश्मन है इसीलिए वह भारत देश के साहूकारों और अन्य ऐसे लोग जो किसानों का शोषण किया करते थे उनको अपना शत्रु बना लिए थे।

हमारे भारत देश को आजादी दिलाते दिलाते वह वीरगति को प्राप्त हो गए और वह समय और दिन था 23 मार्च 1931।अर्थात हम ऐसा कह सकते है की 1931 में हमारे शूरवीर भगत सिंह वीरगति को प्राप्त हुए और वो मर के भी अमर हो गए।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी मैं आप को हमारे शूरवीर bhagat singh information in hindi के बारे में बताया अगर आप को पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करे ताकि उनको भी हमारे भगत सिंह के बारे में पता चले और अगर आप हमे कुछ उझाव देना चाहते है तो अवश्य ही कमेंट करे।

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