भीमराव अंबेडकर जी के बारे में जानकारी 2021 | Dr br ambedkar information in hindi

दोस्तों आज हम आपको बताने वाले हैं डॉ भीमराव अंबेडकर के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है dr br ambedkar information in hindi। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का नाम सभी ने सुना है लेकिन उनके बारे में संपूर्ण जानकारी नहीं है जिस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि information about dr br ambedkar in hindi | dr bhim rao ambedkar in hindi इसलिए मैं आज आपको इनके बारे में जानकारी दूंगा

तो चलिए शुरू करते हैं

भीमराव अंबेडकर जी के बारे में जानकारी | Dr br ambedkar information in hindi | information about dr br ambedkar in hindi

INFOGYANS

भीमराव अंबेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 18 सो 91 में ब्रिटिश भारत मध्य भारत प्रांत वर्तमान समय में जो मध्यप्रदेश राज्य के नाम से जाना जाता है वहां पर स्थित महू नगर में हुआ था उनके पिताजी का नाम रामजी मालोजी सकपाल तथा उनकी माता का नाम भीमाबाई था भीमराव अंबेडकर इनकी चौदहवीं संतान थे।
भीमराव की जात हिंदू महार जाति का था जो उस समय के लिए अछूत मानी जाती थी जिस वजह से उन्हें तथा उनके परिवार को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से भेदभाव सहना पड़ता था।

भीमराव अंबेडकर के पूर्वज ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत भी रहे। भीमराव अंबेडकर के पिता भारतीय सेना की महू छावनी में सेवारत थे और उस स्थान पर कार्य करते हुए रामजी सकपाल सूबेदार के पद तक गए थे रामजी सकपाल मराठी और अंग्रेजी के औपचारिक शिक्षा को प्राप्त किया था।

अछूत जाति के कारण बालक भीम को कई सारे सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ता था विद्यालय में पढ़ाई में सक्षम होने के बावजूद भी भीमराव अंबेडकर छुआछूत की वजह से कई समस्याओं का सामना करता था इसके पश्चात 7 नवंबर उन्नीस सौ में भीमराव के पिताजी सतारा के गवर्नमेंट स्कूल में भीमराव जी का नाम भीमा रामजी अंबाडवेकरकर दाखिल कराया।

भीमराव अंबेडकर को बचपन में सभी बीमा के नाम से जानते थे। इसके पश्चात एक ब्राम्हण शिक्षक कृष्णा केशव अंबेडकर ने उनका नाम आबडवेकर को सरल भाषा में लिखते हुए अंबेडकर कर दिया जिस वजह से वर्तमान समय में भी हम उनको अंबेडकर के नाम से ही जानते हैं।

भीमराव अंबेडकर जब 15 वर्ष की आयु के थे तब उनका विवाह एक 9 साल की कन्या के साथ करा दिया गया जिसका नाम रमाबाई था।

भीमराव अंबेडकर ने अपने प्राथमिक शिक्षा सातारा नगर के राजवाड़ा चौक पर स्थित सरकारी विद्यालय में अंग्रेजी की पहली कक्षा में दाखिला लिया इसलिए 7 नवंबर को महाराष्ट्र में विद्यार्थी दिवस मनाया जाता है। भीमराव अंबेडकर ने जब अपनी चाची कक्षा उत्तीर्ण की तब यह एक असामान्य बात थी अछूतों में तब इन सफलता को सार्वजनिक समारोह के रूप में मनाया गया और इसी दौरान उनके परिवार एवं लेखक दादा कुलेश्वर द्वारा लिखी गई बुद्ध की जीवनी भीमराव अंबेडकर को भेंट स्वरूप दी गई।

जिसे पढ़कर गौतम बुधवा बुद्ध धर्म के बारे में एवं उनकी शिक्षा से प्रभावित हुए। भीमराव अंबेडकर के माध्यमिक शिक्षा सन 18 सो 97 में एलफिंस्टन रोड पर स्थित सरकारी विद्यालय में अपनी शिक्षा प्राप्त की। भीमराव अंबेडकर ने सन 1907 में अपनी मैट्रिक की परीक्षा उत्तरण की उसके पश्चात उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज में दाखिला लिया इसका मुंबई विश्वविद्यालय से संबंध था।

भीमराव अंबेडकर पहले व्यक्ति थे जो इस समुदाय में इतनी अस्तर तक शिक्षा प्राप्त की थी। सन 1912 तक मुंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र राजनीतिक विज्ञान में स्नातक अर्थात बीए की डिग्री प्राप्त की और बड़ौदा राज्य के साथ उन्होंने काम करना शुरू कर दिया।

भीमराव अंबेडकर के पिता का देहांत 2 फरवरी 1913 में हो गया।भीमराव अंबेडकर ने कहा कि छुआछूत किसी की गुलामी करने से भी बदतर है। भीमराव अंबेडकर बड़ौदा की रियासत राज्य द्वारा अपनी शिक्षा प्राप्त किए थे जिस वजह से उनको उनकी सेवा करने के लिए बाध्य होना पड़ा भीमराव अंबेडकर को महाराजा गायकवाड की सैन्य सचिव नियुक्त किया गया लेकिन वहां पर भी भेदभाव एवं छुआछूत के कारण भीमराव अंबेडकर को वह नौकरी को छोड़ना पड़ा।

उसके बाद उन्हें अपने परिवार के लिए जीविका साधन खोजने के लिए पुनः प्रयास में लग गए। और इसी वजह से उनको एक निजी शिक्षक के रूप में तथा एक लेखाकार के रूप में भी कार्य करना पड़ा। भीमराव अंबेडकर ने उच्च न्यायालय मैं अछूतों की शिक्षा को बढ़ावा तथा उन्हें ऊपर उठाने के कई सारे प्रयास किए उन्होंने केंद्रीय संस्थान बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना की जिसका उद्देश्य शिक्षा और सामाजिक आर्थिक सुधार एवं अवसाद ग्रस्त वर्गों के रूप में संदर्भित बहिष्कार के कल्याण को करना।

भीमराव अंबेडकर ने दलित के अधिकारों की रक्षा करने के लिए 5 पत्रिका निकाली जिनका नाम मूकनायक बहिष्कृत भारत समता प्रबुद्ध भारत और जनता। 1 जनवरी 1818 को द्वितीय आंग्ल मराठा युद्ध के अंतर्गत कोरेगांव की लड़ाई में जितने भी महार सैनिक मारे गए उनके सम्मान में भीमराव अंबेडकर ने 1 जनवरी 1927 में कोरेगांव में विजय स्मारक का एक समारोह आयोजित किया और वहां पर जितने भी महार समुदाय के सैनिक मारे गए थे उनका नाम संगमरमर के पत्थरों पर लिखा गया।

भीमराव अंबेडकर अछूत के सबसे बड़ी हस्ती बन चुके थे उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा उसके नेता महात्मा गांधी की भी आलोचना की उन्होंने उन पर आरोप लगाया कि अछूत समुदाय को एक करुणा की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करते थे। भीमराव अंबेडकर ने अछूतों को मंदिर में प्रवेश करने के लिए भी कई सारे कार्य की।

भीमराव अंबेडकर सन 1926 में अपना राजनीतिक कैरियर शुरू किया था तथा 1956 तक वे राजनीतिक क्षेत्र के कई सारे पदों पर रहे। भीमराव अंबेडकर सन 1936 तक मुंबई लेजिसलेटिव काउंसलिंग के भी सदस्य रहे थे। भीमराव अंबेडकर एक सरकारी लॉ कॉलेज के प्रधानाचार्य नियुक्त हुए सन 13 अक्टूबर 1935 में उस पद पर उन्होंने 2 वर्ष तक कार्य किया।

10 से 12 साल तक हिंदू धर्म में रहते हुए भीमराव अंबेडकर ने हिंदू धर्म तथा हिंदू समाज को सुधारने और सभी मनुष्य एवं समाज में समानता तथा सम्मान प्राप्त कराने के लिए कई सारे प्रयत्न किए परंतु 100 वर्ड हिंदुओं का हृदय परिवर्तन नहीं हुआ कुछ लोगों ने उनको हिंदू धर्म विनाशक भी कह दिया था।

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निष्कर्ष

दोस्तों हमने आपको इस ब्लॉग में लिखकर बताया dr br ambedkar information in hindi। अगर आपको इनके बारे में जानकर अच्छा लगा हो और यह भी आपका कोई सवाल हो तो आप उसके लिए हमें कमेंट कर सकते हैं हम आपको कमेंट में अवश्य ही जवाब देंगे।

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