डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन् जी के बारे में जानकारी 2021 | Dr sarvepalli radhakrishnan biography in hindi language

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन् के बारे में बताने वाले हैं अर्थात आज का हमारा विषय है dr sarvepalli radhakrishnan biography in hindi language | सर्वपल्ली राधाकृष्णन् का नाम हम सभी ने सुना है लेकिन उनके जीवन शैली यह हम कार्यों के बारे में हमें पता नहीं है जीस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि dr sarvepalli radhakrishnan information in hindi , about sarvepalli radhakrishnan in hindi इसलिए मैं आज आपको उनके बारे में बताऊँगा|

तो चलिए शुरू करते हैं

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन् जी के बारे में जानकारी | Dr sarvepalli radhakrishnan biography in hindi language | dr sarvepalli radhakrishnan information in hindi

INFOGYANS

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन् का जन्म 5 सितंबर 1888 में भारत के मद्रास में तिरुमनी गांव में हुआ था इनके माता का नाम सिताम्मा था तथा इनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी था| यह एक ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए इनका परिवार बेहद गरीब था इस वजह से बचपन में सर्वपल्ली राधाकृष्णन् को किसी भी तरह की सुख सुविधा ना प्राप्त हो सकी|

सर्वपल्ली राधाकृष्णन् का विवाह सन् 1904 में उनकी चचेरी बहन सिवाकामू से हुआ तब इनकी आयु 16 वर्ष की थी और इनको छह संतानें प्राप्त हुई जिसमें पांच बेटी एवं एक बेटा था उन्होंने अपने बेटे का नाम सर्वपल्ली गोपाल रखा|

राधा कृष्णन का बचपन उनके गांव में व्यतीत हुआ था इस वजह से उन्होंने अपनी आरंभिक शिक्षा अपने गांव में ही प्राप्त की| तत्पश्चात आगे की शिक्षा प्राप्त करने के लिए उनके पिता ने उनको क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल जो तिरुपति में स्थित है वहाँ पर उनका दाखिला करवाया वहाँ पर उन्होंने अपना चार वर्ष व्यतीत किया और सन राधा कृष्णन ने वेलुरु के कॉलेज से अपनी शिक्षा ग्रहण की|

सन् 1906 में डॉक्टर्स और पहली राधाकृष्णन् ने दर्शनशास्त्र में अपना एमए की डिग्री प्राप्त की| अपनी ये डिग्री प्राप्त करने के बाद उनको सन में प्रेसिडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र का अध्यापक बना दिया गया जो मद्रास में स्थित था और उसके 7 साल बाद अर्थात् सन् 1916 में उनको मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में इसी विषय में सहायक प्राध्यापक बना दिया गया एम सन 1918 में मैसूर यूनिवर्सिटी के लिए उनको दर्शनशास्त्र के विषय में प्रोफेसर के रूप में चुना गया|
इसके बाद सर्वपल्ली राधाकृष्णन् इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के विषय में शिक्षक स्वरूप कार्यरत रहे सर्वपल्ली राधाकृष्णन् शिक्षा को अत्यधिक महत्व देते थे जीस वजह से वो खुद भी इतने महान विद्वान थे वो हमेशा कुछ न कुछ नया सीखने के लिए इच्छुक रहते थे|

सर्वपल्ली राधाकृष्णन् जीस विद्यालय से अपनी एमए की डिग्री प्राप्त कर रही थी उनको उसी कॉलेज में उप कुलपति बना दिया गया लेकिन राधाकृष्णन् वहाँ पर अत्यधिक समय तक नहीं रहे उन्होंने मात्र एक वर्ष के भीतर ही उस विद्यालय को छोड़कर बनारस विश्वविद्यालय में उप कुलपति बन गए उसी दौरान उन्होंने दर्शनशास्त्र के विषय में कई सारे पुस्तकें भी लिखी हैं|

राजनीतिक

सर्वपल्ली राधाकृष्णन् इतने प्रतिभाशाली व्यक्ति थे कि स्वतंत्रता के पश्चात उनको हमारे देश का संविधान बनाने की समिति में सदस्य बनाया गया और इस समिति में वह सन् 1947 से लेकर सन् 1949 तक सदस्य रहे और उसी दौरान वह कई सारे विश् वविद्यालयों में चेयरमैन के रूप में भी कार्यरत रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू यह चाहते थे कि सर्वपल्ली राधा कृष्णन राजनीति व्यक्ति होते हुए भी संविधान सभा के सदस्य बनाए जाएं|
राधा कृष्णन को यह आदेश दिया गया कि वह अपना संबोधन रात्रि के 12:00 बजे से पहले पूर्ण कर दें क्योंकि तत्पश्चात हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को संसद द्वारा शपथ लेनी थी|

सर्वपल्ली राधाकृष्णन् सन् 1952 से लेकर 1962 तक उप राष्ट्रीय स्वरूप कार्यरत रहे तत्पश्चात उनको राष्ट्रपति स्वरूप चुना गया और उनका यह कार्यकाल कई सारी चुनौतियों से भरा था क्योंकि उस समय भारत के साथ चीन और पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था और इस युद्ध में भारत चीन से परास्त हो रहा था तथा उसी समय दो प्रधानमंत्रियों की मृत्यु हो गई|

उपाधि एवं अवॉर्ड

नाइट बेचलर सर की उपाधि इनको सन 1931 में प्राप्त हुई लेकिन सर्वपल्ली राधाकृष्णन् ने इस उपाधि को आजादी के पश्चात लौटा दिया|
सर्वपल्ली राधाकृष्णन् को फेलो ऑफ द ब्रिटिश एकेडमी का अवॉर्ड सन 1938 मैं दी गई|
सर्वपल्ली राधाकृष्णन् को हमारे देश का सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न सन 1954 में उनके शिक्षा और राजनीतिक मैं अत्यधिक योगदान देने के लिए दिया गया|
वर्तमान समय में हम सभी विद्यार्थी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है यह उपाधि भी इन्हीं को सम्मान में दी गई है सन् 1962 में तभी से हम सभी सर्वपल्ली राधाकृष्णन् के सम्मान में शिक्षक दिवस मनाते हैं|
तथा उसी वर्ष इनको ब्रिटिश अकेडमी का सदस्य भी बनाया गया था|
सर्वपल्ली राधाकृष्णन् को पॉप जॉन पॉल द्वारा गोल्डन स्पर भेंट स्वरूप दिया|
इनको इंग्लैंड सरकार द्वारा ऑर्डर ऑफ मेरिट का सम्मान दिया गया|
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा सर्वपल्ली राधाकृष्णन् के नाम पर स्कॉलरशिप की शुरुआत सन् 1989 में करी|

भारतीय संस्कृत

राधाकृष्णन् कोई अब बात बता थी कि जीवन बहुत ही छोटा है जिसकी वजह से वह सुख दुख में सभी को समभाव रहना सिखाते थे| वह कहते हैं कि मृत्यु एक ऐसी सच्चाई है जो अमीरी और गरीबी नहीं देखती करना ही उनमें किसी भी तरह का भेदभाव करती है और एक व्यक्ति पूरी तरह से ज्ञानी तब होता है जब उसके अंदर के सभी अज्ञान समाप्त हो जाए|
वह कहते हैं कि एक साधारण जिंदगी अमीरी के अहंकार में जीने से बहुत बेहतर है तथा शांत मस्तिष्क सांसदों और दरबारों की गडगडाहट से बहुत अधिक बेहतर है|

उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें

भारत और चीन, भारत और विश्व, भारत की अंतरात्मा, नव युवकों से, प्रेरणा पुरुष, भारतीय संस्कृति कुछ विचार, भारतीय दर्शन 1 तथा भारतीय दर्शन 2, उपनिषदों का संदेश, गौतम बुद्ध जीवन और दर्शन|

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको इस ब्लॉग में लिखकर बताया dr sarvepalli radhakrishnan biography in hindi language अगर आपको यह पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यद्यपि आप का कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं हम आपके सवाल का जवाब आप ही देंगे|

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