गौतम बुध के बारे में जानकारी 2021 | Gautam buddha information in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में बताने वाले हैं गौतम बुद्ध जी के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है gautam buddha information in hindi। गौतम बुध का नाम तो सुना सभी लोगों ने है लेकिन उनके बारे में लोगों को इतना नहीं पता है जिस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह से सर्च होते रहते हैं जैसे की gautam buddha information in hindi , gautam buddha biography in hindi। इसलिए मैं आपको इनके बारे में संपूर्ण जानकारी दूंगा

तो चलिए शुरू करते हैं

गौतम बुध के बारे में जानकारी | Gautam buddha information in hindi | gautam buddha biography in hindi

INFOGYANS

गौतम बुध का जन्म 563 ईसवी पूर्व शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिलवस्तु के निकट एक लुंबनी में हुआ था जो वर्तमान समय में नेपाल में स्थित है। नेपाल के तराई क्षेत्र में कपिलवस्तु और देवदास के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 मील दूर पश्चिम में रिकमिनादे नाम स्थान के पास स्थित लुंबिनी वन है। इनके पिता का नाम शुद्धोदन था तथा उनकी माता का नाम रानी महामाया था जो कपिलवस्तु की महारानी थी और इनका नैहर देवदह था। जब इनकी माता देवदह जा रही थी तब रास्ते में उन्होंने एक बालक को जन्म दिया जिसका नाम सिद्धार्थ रखा गया और गौतम गोत्र में पैदा होने के कारण उनको हम गौतम भी कहते हैं।

कई सारी कथा से यह बात पता चलती है कि सिद्धार्थ अर्थात् गौतम बुद्ध के जन्म के पश्चात उनकी माता का देहांत हो गया तब वह मात्र 7 दिन के थे। गौतम बुध का पालन पोषण उनकी मां की बहन अर्थात मौसी ने किया और उनके पिताजी शुद्धोधन की दूसरी पत्नी महा प्रजापति ने की।

गौतम बुध का बचपन का नाम सिद्धार्थ था जिसका अर्थ है वह व्यक्ति जो सिद्धि प्राप्त करने के लिए जन्म लिया हो। जब सिद्धार्थ का जन्म समारोह चल रहा था तब साधु दृष्टा ने कहा कि या तो यह बच्चा भविष्य में चलकर एक महान राजा बनेगा या एक बहुत महान पवित्र पथ प्रदर्शक बनेगा।

उनके पिताजी ने पांचवे दिन एक फिर से नामकरण समारोह आयोजित किया और उसमें उन्होंने महान 8 ब्राह्मण विद्वानों को आमंत्रित किया और सिद्धार्थ के भविष्य के बारे में बताने बोला लेकिन सभी ने एक ही भविष्यवाणी की कि यह बच्चा भविष्य में चल कर या तो एक महान राजा बनेगा या महान पथ प्रदर्शक।

सिद्धार्थ के गुरु विश्वामित्र थे जिनसे उन्होंने वेद उपनिषद की शिक्षा के साथ-साथ राजकाज और युद्ध विद्या भी सीखी इसी के साथ साथ कुश्ती घुड़दौड़ तीर कमान रथ हांकने में सिद्धार्थ का मुकाबला करने वाला कोई भी नहीं था जब सिद्धार्थ 16 वर्ष के हुए तब उनका विवाह यशोधरा नाम की एक बालिका के साथ करा दिया गया।

सिद्धार्थ अपनी पत्नी यशोधरा के साथ अपने महल में रहने लगे और उसके कुछ दिन पश्चात उनको एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम उन्होंने राहुल रखा लेकिन उसके कुछ दिन बाद उनका मन वैराग्य में चला गया और वह सुख शांति के लिए अपने परिवार को त्याग कर तपस्या के लिए चले गए।

सिद्धार्थ के पिता शुद्धोधन ने ऐसे तीन महाल बनवाए थे जो तीन ऋतु के लिए बहुत ही आनंदमई था वहां पर सिद्धार्थ की सेवा के लिए सेविका ए मनोरंजन के लिए नृत्य की थी लेकिन सिद्धार्थ को यह सब रोक नहीं पा रहा था एक बार सिद्धार्थ अपने महल के एक बगीचे में शायर के लिए निकले वहां पर उन्होंने देखा कि एक बूढ़ा व्यक्ति जा रहा है जो लाठी के सहारे काटते हुए सड़क पर चल रहा है।

दूसरी बार जब सिद्धार्थ बगीचे में गए थे तब वहां पर एक रोगी भी जा रहा था जो दूसरे व्यक्ति के सहारे बहुत ही कठिनाई के साथ उस सड़क पर चल पा रहा था उसके पश्चात एक दिन सिद्धार्थ फिर से बगीचे में सैर पर निकले और उन्होंने वहां पर देखा कि एक अर्थी जा रही है जिसके पीछे कुछ लोग रो रहे हैं कुछ छाती पीट रहे हैं और कुछ अपने बाल को खींच रहे हैं यह सब उनको बहुत विचलित किया।

1 दिन फिर से सिद्धार्थ उसी बगीचे में शहर के लिए निकले वहां पर उनको एक सन्यासी दिखा जो पूरी दुनिया की मोह माया से दूर बहुत प्रसन्न होकर जा रहा था वह सन्यासी सिद्धार्थ को बहुत आकर्षक किया।

सिद्धार्थ अपनी पत्नी यशोधरा और अपने पुत्र राहुल तथा अपने राज्य कपिलवस्तु को त्याग कर तपस्या के लिए चल पड़े और वह चलते हुए राजगृह पहुंचे जहां पर उन्होंने भिक्षा मांगी और उसके पश्चात हुआ चलते चलते आलार कालाम तथा उद्दक रामपुत्र के पास पहुंचकर वहां पर उन्होंने योग साधना सीखा समाधि लगाने के बारे में सिखा लेकिन उसके पश्चात भी उनको संतोष नहीं हुआ और वह वहां से चले गए और उरुवेला पहुंचे और वहां पर उन्होंने तरह-तरह के तपस्या की।

गौतम बुद्ध ने अहिंसा पर बहुत जोर दिया उनका मानना था कि पशु बलि और यज्ञ बेकार की कार्य हैं जिस वजह से उन्होंने उनकी निंदा की। गौतम बुद्ध के प्रथम गुरु आलार कलाम थे। गौतम बुध जब 35 वर्ष की आयु के थे तब उन्होंने वैशाखी पूर्णिमा के दिन सिद्धार्थ पीपल वृक्ष के नीचे ध्यान में थे।

गौतम बुद्ध ने बोधगया में निरंजना नदी के किनारे कई दिनों तक कठोर तपस्या की उसके पश्चात उन्होंने सुजाता नाम की लड़की के हाथों से खीर को खाकर अपने उपवास को तोड़ा। कुछ दिन पश्चात उस लड़की को एक पुत्र की प्राप्ति हुई और वह पीपल वृक्ष से मन्नत के लिए खीर बना कर लाए वहां पर गौतम बुध बैठकर ध्यान कर रहे थे सुजाता को लगा कि जैसे वृक्ष देवता ही पूजा लेने के लिए वहां पर बैठे हैं और सुजाता ने उनको बहुत ही आदर के साथ खीर भेंट की और कहा जैसे मेरी मनोकामना पूरी हुई है वैसे आपकी भी होगी।

उसी रात गौतम बुध जी की तपस्या सफल हुई और उनको सच्चा बोध हुआ तभी से सिद्धार्थ बुद्ध कहलाने लगे और गौतम बुध जिस पीपल वृक्ष के नीचे तपस्या कर रहे थे जहां पर उन्हें बौद्ध की प्राप्ति हुई उसे बोधि वृक्ष के नाम से जाना जाता है जो गया के समीपवर्ती स्थान पर स्थित है।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको इस ब्लॉग में बताया gautam buddha information in hindi। अगर आप को के बारे में जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यदि आपका कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं।

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