गुड़ी पड़वा के बारे में जानकारी 2021 | Gudi Padwa Information In Hindi

दोस्तो आज मैं आप को जानकारी देने जा रहा हु गुडी पाडवा के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है gudi padwa information in hindi। आज मैं आपको इस ब्लॉग में पूरी जानकारी दूंगा gudi padwa festival information in hindi। गुड़ी पड़वा के बारे में जाना हम सभी के लिए नितांत आवश्यक है क्योंकि यह हमारे हिंदू धर्म के लिए बहुत ही महान उत्सव माना जाता है।

तो चलिए शुरू करते हैं आज का हमारा विषय about ugadi festival in hindi

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गुड़ी पड़वा के बारे में जानकारी 2021 | Gudi Padwa Information In Hindi

हम सभी हिंदू धर्म के समुदाय के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है और इसीलिए हम सभी हिंदू समुदाय के लोग इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं कई स्थानों पर गुड़ी पड़वा के दिन गाने बजाकर डांस किए जाते हैं।

गुड़ी पड़वा के दिन ही हमारे भारत देश में नववर्ष की शुरुआत होती है जो चैत्र के महीने में शुक्ल प्रतिपदा के दिन होती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा कोही गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है क्योंकि यह हम सभी हिंदू समुदाय के लोगों का नया वर्ष का शुरुआत होता है।

हमारे हिंदू समुदाय में ऐसी मान्यता है कि यदि गुड़ी पड़वा के दिन हम अपने घर के द्वार पर गुड़ी एवं आम के पत्ते का हार बना कर टांगे तो इससे हमारे घर पर सुख समृद्धि प्रवेश करती है इसलिए लोग इस दिन अपने घर के द्वार पर आम के पत्ते एवं गुड़ी का हार बना कर टांगते हैं।

हमारा पूरा देश मैं प्रतिदिन किसी न किसी तरह का त्यौहार एवं उत्सव मनाया जाता है उसमें गुड़ी पड़वा जो महाराष्ट्र के लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है हमारे महाराष्ट्र राज्य में गुड़ी पड़वा को बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ मनाते हैं। यह लोग उस दिन गुड़ी की पूजा करते हैं और उसे अपने दरवाजे पर रखते हैं।

जब हमारे देश में गुड़ी पड़वा का त्यौहार मनाया जाता है तब तक बसंत ऋतु का आगमन हुआ रहता है वसंत ऋतु में पेड़ पौधे में नहीं पति आ जाती है फूल के पौधे में फूल लगने लगता है और गुड़ी पड़वा का त्यौहार एक कृषि का त्यौहार माना गया है अर्थात यह कृषि पर्व के रूप से भी मनाया जाता है।

हम सभी हिंदू धर्म के समुदायों में ऐसी मान्यता है कि गुड़ी पड़वा के दिन ही भगवान ब्रह्मा जी ने हमारे पूरे सृष्टि की रचना की थी एवं इसी दिन हमारे प्रभु श्री रामचंद्र जी का भी राज्याभिषेक हुआ था।

हमारे हिंदू समुदाय में जितने भी लोग गुड़ी पड़वा को मनाते हैं वह सभी इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके नए वस्त्र पहनकर अपने रिश्तेदारों एवं दोस्तों को उपहार देना और उनसे उपहार लेने की भी प्रथा है और इसी तरह से वह उनको अपने घर पर बुलाकर साथ में भोजन करते हैं एक तरह से कह सकते हैं कि यह दावत के रूप में भी मनाया जाता है।

हमारे महाराष्ट्र राज्य में इस त्यौहार को गुड़ी पड़वा के नाम से जानते हैं तथा आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में इसे उगादि के नाम से जाना जाता है।

इस दिन हम सभी हिंदू समुदाय के लोगों के घरों में भगवान एवं मिठाइयां बनती है और कई स्थानों पर नीम और गुण की भी मिठाई बनाई जाती है नीम के कोपल को खाकर गुड़ खाया जाता है।

हमारे हिंदू समुदाय में ऐसी भी मान्यता है कि एक शालीवाहन नाम का कुंभार ने मिट्टी का सैनिक बनाया और उसमें पानी छिड़ककर उन सब को जिंदा कर दिया और अपने सबसे शक्तिशाली शत्रु को उसने उसी से परास्त किया।

हमारे देश के सबसे महान गणितज्ञ भास्कराचार्य जी ने इसी दिन से सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना करके पंचांग की रचना की थी। इसी दिन शालिवाहन शक का भी आरंभ होता है। किसी दिन प्रभु श्री रामचंद्र जी ने दक्षिणी भारत को महाराजा बालि के अत्याचार से बचाया था।

प्रतिपदा

हमारा ब्रह्म पुराण ऐसा कहता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी।
गुड़ी पड़वा के दिन ही प्रभु श्री रामचंद्र जी जिनको मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी कहा जाता है उनका राज्याभिषेक हुआ था।
इसी दिन से अर्थात गुड़ी पड़वा के दिन से ही मां दुर्गा के नवरात्रि का व्रत प्रारंभ होता है।
इसी दिन युधिष्ठिर का भी राज्य अभिषेक किया गया था और तभी से उनके संवत का आरंभ हुआ था।
गुड़ी पड़वा के दिन ही भारतीय सरकार का भारतीय पंचांग आरंभ होता है।
गुड़ी पड़वा के दिन ही हम सभी हिंदू समुदाय के लोगों का नया वर्ष शुरू होता है अर्थात नया वर्ष का आरंभ होता है।
इसी दिन गुरु अंगद देव जी का जन्म दिवस भी है जो हमारे सिख समुदाय के द्वितीय गुरु माने गए हैं।

इस दिन महाराष्ट्र के लोग सुबह से ही पूरी तैयारियां करना शुरू कर देते हैं और इस दिन हुआ एक दूसरे के घर पर भी जाकर उपहारों का आदान-प्रदान करने का प्रथा भी करते हैं कई स्थानों पर गुड़ी पड़वा का त्यौहार नहीं मनाया जाता क्योंकि यह सिर्फ हमारे हिंदू समुदाय का त्यौहार है।

यह त्यौहार कृषि पर्व के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इस समय फसल कट जाती है और लोग अपना सारा कार्य पूरा कर चुके होते हैं इस मौसम में सभी पेड़ों और वनस्पतियों पर नए नए पत्ते एवं फूल होते हैं जिस वजह से यह मौसम और भी ज्यादा सुहाना लगता है क्योंकि बसंत के मौसम में नए पत्तों का उगना बहुत ही सामान्य बात है इतनी सुंदरता देखकर और इस दिन का उल्लास हर एक हिंदू समुदाय के लोगों के अंदर होता है।

इसी दिन ब्रह्मा द्वारा ब्रह्मांड का संरचना किया गया था इसलिए लोग इस दिन अपने घरों में आम और गुड़ी कम हार बनाकर मांगते हैं क्योंकि हमारा हिंदू समुदाय का ऐसा मानना है कि इस दिन हमारे घर में सुख समृद्धि प्रवेश करती है गुड़ी पड़वा के दिन के पहले ही पूरे घर को अच्छी तरह से साफ सुथरा कर दिया जाता है और मिठाइयां बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको इस ब्लॉग में बताया gudi padwa information in hindi। यदि आपको या पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यदि आप चाहते हैं कि हम इसी तरह gudi padwa information in hindi के अन्य विषय पर भी आपको जानकारी दे तो उसके लिए भी आप हमें कमेंट कर सकते हैं।

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