सी वी रमन के बारे में जानकारी 2021 | Information about CV Raman in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में बताने वाले हैं सीवी रमन जी के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है information about cv raman in hindi। सीवी रमन के बारे में लोगों को इतनी जानकारी नहीं है जिस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह से सर्च होते रहते हैं जैसे कि information about dr cv raman in hindi , cv raman wikipedia in hindi संपूर्ण जानकारी दूंगा

तो चलिए शुरू करते हैं

सी वी रमन के बारे में जानकारी | Information about CV Raman in hindi | cv raman wikipedia in hindi

INFOGYANS

सी वी रमन का पूरा नाम चंद्रशेखर वेंकटरमन था इनका जन्म तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली स्थान पर 7 नवंबर सन 18 सो 88 में हुआ था उनके पिता जी का नाम चंद्रशेखर अय्यर था जो एक कॉलेज में भौतिकी के अध्यापक थे। सीवी रमन के माता जी का नाम पार्वती अम्माल था । इनकी माता एक बहुत ही शुभ संकेत परिवार की महिला थी। सीवी रमन की प्रारंभिक शिक्षा विशाखापट्टनम में हुई वहां के विद्वानों की संगति और प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर उनके ऊपर बहुत प्रभाव पड़ा

सी वी रमन जी जब 12 वर्ष के थे तभी उन्होंने मैट्रिक की शिक्षा उत्तरीय कर ली थी तभी उनको श्रीमती एनी बेसेंट का भाषण सुनने को मिला उनके द्वारा लिखे गए लेख पढ़ने मिले सी वी रमन जी ने रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथों का भी अध्ययन किया है इस वजह से सीवी रमन के हृदय पर भारतीय गौरव की अमिट छाप छप गई।

सीवी रमन के पिताजी सी वी रमन को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश भेजने चाहते थे लेकिन एक डॉक्टर ने उनके स्वास्थ्य को देखकर विदेश ना भेजने का सुझाव उनके पिताजी को दिया इसलिए सीवी रमन भारत में ही रह कर अपनी शिक्षा प्राप्त की।

सी वी रमन ने सन उन्नीस सौ तीन में चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में अपना दाखिला कराया और वहां पर उन्होंने प्रधानाध्यापक को अपनी योग्यता से बहुत प्रभावित किया सी वी रमन एक अकेले व्यक्ति थे जो बीए की परीक्षा में पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम श्रेणी में आए थे और इस वजह से उनको भौतिकी में स्वर्ण पदक दिया गया और अंग्रेजी निबंध पर भी उनको सम्मानित और पुरस्कृत किया गया उसके पश्चात सी वी रमन जी ने 1960 में मद्रास विश्वविद्यालय में गणित में प्रथम श्रेणी से m.a. की डिग्री प्राप्त की।

सन उन्नीस सौ छह में सी वी रमन जी ने प्रकाश परिवर्तन पर पहला शोध पत्र लंदन की फिलोसॉफिकल पत्रिका में प्रकाशित किया उसका नाम इन्होंने आयताकृति छिद्र के कारण उत्पन्न असीमित विवर्तन टिप्पणियां।

सीवी रमन जी इतने प्रतिभाशाली व्यक्ति थे लेकिन उनको वैज्ञानिक बनने की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई इसलिए वह भारत सरकार के वित्त विभाग की प्रतियोगिता में बैठ गए। वह उस प्रतियोगिता परीक्षा में भी प्रथम आए और जून 1907 में वे असिस्टेंट अकाउंटेंट जर्नल बनकर कोलकाता गए। उनको जब यह नौकरी मिली थी तब ऐसा लग रहा था कि वह अपने जीवन में पूरी तरह से स्थिर हो गए हैं और आने वाले समय में वह अपने बुढ़ापे में पेंशन प्राप्त करेंगे लेकिन एक दिन जब वह कार्यालय से लौट रहे थे तब उनको एक बोर्ड दिखाई दिया जहां पर लिखा था वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भारतीय परिषद जो वर्तमान समय में इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने वह बोर्ड देखा और तभी परिषद के कार्यालय में पहुंचे और वहां पर जाकर उन्होंने अपना परिचय दिया तथा उस परिसर में प्रयोगशाला में प्रयोग करने की आज्ञा प्राप्त की। उसके पश्चात उनका तबादला हो गया पहले रंगून और फिर नागपुर में। तब तक सीवी रमन ने अपने घर पर ही प्रयोगशाला बना ली थी और वह जब भी समय प्राप्त होता तब वह अपने घर पर ही प्रयोग किया करते थे सन 1911 में उनका तबादला फिर से कोलकाता में हुआ जिस वजह से उनको उस परिषद में फिर से प्रयोग करने का अवसर प्राप्त हुआ इस तरह उन्होंने सन 1917 तक निर्विघ्न रुप से वहां पर प्रयोग किया।

इस अवधि में उन्होंने धोनी के कंपन और कार्यों का सिद्धांत अनुसंधान किया। सन 1917 में कोलकाता विश्वविद्यालय में भौतिकी पर अध्यापक का पद बना तो वहां के कुलपति आशुतोष मुखर्जी जी ने सीवी रमन जी को उसे स्वीकार करने का आमंत्रित किया और सीवी रमन जी ने उनका निमंत्रण स्वीकार किया और उच्च सरकारी पद से त्यागपत्र दे दिया।

कोलकाता विश्वविद्यालय में सीवी रमन जी ने कुछ वर्षों में वस्तुओं में प्रकाश को चलने का अध्ययन किया तब जाकर उनको यह बात पता चली कि इनमें किरणों का पूर्ण समूह बिल्कुल सीधा नहीं चलता उसमें से कुछ भाग राह बदल कर बिखर जाते हैं।

सन 1921 में विश्वविद्यालयों की कांग्रेसमें प्रतिनिधि बन कर वह ऑक्सफोर्ड चले गए। सी वी रमन जी को सन 1930 में नोबेल पुरस्कार दिया गया जिस वजह से रमन प्रभाव के अनुसंधान के लिए नया क्षेत्र खुल गया।

सन 1948 में सेवानिवृत्ति के बाद बेंगलुरु में रमन शोध संस्थान का स्थापना किया सी वी रमन जी को सन 1954 में भारत सरकार द्वारा हमारे राष्ट्र का सबसे सम्मानित पद भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया ।उनको सन 1957 में लेनिन शांति कब पुरस्कार प्रदान किया गया।

28 फरवरी 1928 को चंद शेखर वेंकटरमन ने रामन प्रभाव की खोज की जिसकी याद में हमारा पूरा भारत वर्ष इस दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाता है। सी वी रमन जी एक बहुत ही प्रसिद्ध और महान वैज्ञानिक उन्होंने अपने अनुसंधान के माध्यम से लोगों को यह दिखाया कि प्रकाश एक पारदर्शी सामग्री के आर पार हो सकता है। सी वी रमन जी एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया था यह पूरे एशिया के प्रथम व्यक्ति थे जिस वजह से एशियाई होने पर गर्व भी प्राप्त है।

रमन प्रभाव एक ऐसी घटना है जिसमें प्रकाश के अणुओं द्वारा हटाए जाने पर वह प्रकाश अपने तरंग धैर्य में बदल जाता है। सी वी रमन जी नहीं हम सभी भारत वासियों को प्रकाश से अवगत कराया तथा उसके कई सारे जानकारी अभी हम सभी को दिए जिस वजह से वर्तमान समय पर उनके सिद्धांतों को हम सभी अपने विद्यालयों में पढ़ते हैं।

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निष्कर्ष

दोस्तों की हमने आपको इस ब्लॉग में बताया information about cv raman in hindi। अगर आपको यह पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यदि आपका कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं।

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