सुभाष चंद्र बोस के बारे में जानकारी 2021 | Information About Subhash Chandra Bose In Hindi

दोस्तों आज मैं आपको इस ब्लॉग में बताने वाला हूं सुभाष चंद्र बोस जी के बारे में आज का हमारा जो विषय है वह है information about subhash chandra bose in hindi। सुभाष चंद्र बोस जी हमारे देश को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए बहुत सारी लड़ाइयां लड़ी। इसलिए मैं आज आपको इनके बारे में कुछ बातें बनाना चाहता हूं ताकि आपको सुभाष चंद्र बोस जी के बारे में पता चल जाए लेकिन कुछ लोगों को पहले से ही पता है जिस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते हैं जैसे कि information about netaji subhash chandra bose in hindi , information about subhash chandra bose in hindi language

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सुभाष चंद्र बोस के बारे में जानकारी 2021 | Information About Subhash Chandra Bose In Hindi

सुभाष चंद्र बोस जी का जन्म 23 जनवरी 18 सो 97 में उड़ीसा के एक कटक शहर में हुआ था इनके माता का नाम प्रभावती और उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस था।

सुभाष चंद्र बोस जी स्वतंत्रता के लिए कई बार लड़े हैं द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इन्होंने आजाद हिंद फौज का निर्माण किया अंग्रेजों से लड़ने के लिए जापान की मदद से।

वर्तमान समय में हम जो जय हिंद का नारा लगाते हैं वह सुभाष चंद्र बोस जी द्वारा दिया गया था जो पूरे भारत देश का राष्ट्रीय नारा बन चुका है उस समय भी यह राष्ट्रीय नारा के रूप में बोला जाता था अंग्रेजो के खिलाफ जय हिंद का नारा बहुत प्रचलित हुआ।

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा सुभाष चंद्र जी ने इस नारे को भी बहुत प्रचलित किया उस समय यह बहुत ज्यादा बोला जाता था सुभाष चंद्र बोस का दिमाग बहुत ही तेज था। उस समय के जितने भी भारतवासी थे वह सभी इनको नेताजी के नाम से संबोधित किया करते थे और यह नाम वर्तमान समय में चला आ रहा है इस समय भी लोग उनको नेताजी के नाम से संबोधित करते हैं।

सुभाष चंद्र बोस जी के पिता जानकीनाथ बोस कटक के बहुत प्रसिद्ध वकील थे वह पहले सरकारी वकील हुआ करते थे लेकिन कुछ समय पश्चात उन्होंने निजी प्रैक्टिस शुरू कर दी और वह कई दिनों तक कटक के महापालिका में काम किया है। जानकीनाथ बोस जी बंगाल के विधानसभा में भी काम कर चुके हैं अर्थात उस के सदस्य रह चुके हैं।

प्रभावती और जानकीनाथ बोस जी के 14 संताने थी अर्थात सुभाष चंद्र बोस जी 14 भाई-बहन थे जिनमें से 6 बहने और 8 भाई थे सुभाष चंद्र बोस अपने माता पिता के नौवीं संतान थे और पांचवे बेटे।

सुभाष चंद्र बोस जी अपने प्राइमरी की शिक्षा प्रोटेस्टेंट स्कूल से पूर्ण की और सन उन्नीस सौ नौ में उन्होंने रेवेनशा कॉलेजिएट स्कूल में दाखिला ले लिए। उस स्कूल के प्रिंसिपल बेनीमाधव दास जी थे जिनके स्वभाव का का सुभाष के मन पर बहुत ही अच्छा प्रभाव पड़ा। सुभाष चंद्र बोस जी बस 15 वर्ष की आयु में विवेकानन्द साहित्य का पूर्ण अध्य्यन कर लिया था।

सुभाष चंद्र बोस जी सन 1915 में अपने इंटरमीडिएट की परीक्षा देते वक्त बीमार हो जाने की वजह से प्रथम श्रेणी में ना आ सके लेकिन बीमार होने के बावजूद भी उन्होंने अपनी परीक्षा को द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण किया।

उसके बाद सन् 1916 में सुभाष चंद्र बोस जी अपने दर्शनशास्त्र की पढ़ाई के लिए बीए में नाम दाखिल कराया लेकिन किसी कारण वश छात्रों और अध्यापकों में विद्रोह हो गया और सुभाष चंद्र बोस जी छात्रों का नेतृत्व संभाला जिस वजह से सुभाष चंद्र बोस जी को 1 साल के लिए उस कॉलेज से निकाल दिया गया।

सुभाष चंद्र बोस जी बंगाल के 49वीं बंगाल रेजीमेण्ट के लिए परीक्षा दी थी लेकिन उन्होंने इनकी आंखें खराब होने की वजह से अयोग्य घोषित करके इनको सेना में लेने से इंकार कर दिया।

सुभाष की पिता की इच्छा थी कि वह आईसीएस बने लेकिन सुभाष चंद्र बोस की हार को देखते हुए उनको वह परीक्षा एक ही बार में पूर्ण करनी अर्थात उत्तरण करनी थी जिस वजह से सुभाष चंद्र बोस जी ने अपने पिताजी से 24 घंटे का समय लिया ताकि वह यह सोच सके कि उनको एग्जाम देना है या ना देना है लेकिन उनका अंतिम फैसला एग्जाम देने का ही था।

महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन का नेतृत्व दास बाबू बंगाल में कर रहे थे और उस आंदोलन में सुभाष चंद्र बोस भी सम्मिलित हो गए। दास बाबू अंग्रेजों के अंतर्गत स्वराज पार्टी की स्थापना की।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सितंबर 1939 में सुभाष चंद्र बोस जी ने एक जन आंदोलन करने का योजना बनाया और इस योजना के तहत उन्होंने पूरे भारत के लोगों को प्रोत्साहित किया और उनको इस योजना से जुड़ने के लिए कहा जिस वजह से लोग उस जन आंदोलन में जुड़ना शुरू हो गए और जब इस बात की खबर अंग्रेज के सरकारों को पहुंची तब उन्होंने सुभाष चंद्र बोस जी को जेल में बंद कर दिया और 2 हफ्ते तक उन्हें खाना नहीं दिया खाना ना खाने की वजह से उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और अंग्रेजों को इस बात का डर था कि हंगामा होगा जिस वजह से उन्होंने उनको एक घर में नजरबंद करके रखा।

सुभाष चंद्र बोस जी द्वारा संगठित किया गया आजाद हिंद फौज युद्ध के दौरान जब पीछे हटने लगी तब जापानी सेना द्वारा नेताजी के भाग जाने की पूरी व्यवस्था कर दी गई थी परंतु सुभाष चंद्र बोस जी ने झांसी की रानी रेजिमेंट की लड़कियों के साथ सैकड़ों मील चलना स्वीकार किया जिस वजह से वह एक सच्चे नेतृत्व के आदर्श बन गए।

सुभाष चंद्र बोस जी ने हमारे देश को आजाद करने के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे दी थी जिस वजह से वर्तमान समय में हम सभी उनको इतना मान सम्मान देते हैं सुभाष चंद्र बोस जी मर के भी हमारे हो गए और उनका किया गया कार्य असफल नहीं हुआ और हमारे भारत को अंग्रेजों से आजादी मिल गई और हम सब वर्तमान समय में आजाद हैं इन सब के पीछे सुभाष चंद्र बोस जी का बहुत बड़ा योगदान है। सुभाष चंद्र बोस जी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 में हुई थी।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको इस ब्लॉग में बताया information about subhash chandra bose in hindi। अगर आप को यह ब्लॉग पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करे और अगर आप का कोई सवाल है तो आप हमे कॉमेंट में पूछ सकते है।

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