जयशंकर प्रसाद जी के बारे में जानकारी 2021 | Jai shankar prasad biography in hindi

दोस्तों आज हम इस ब्लॉग में आपको जयशंकर प्रसाद के बारे में बताएंगे अर्थात आज का हमारा विषय है jai shankar prasad biography in hindi। जयशंकर प्रसाद के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है जिस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च हुआ करते हैं जैसे कि jaishankar prasad ji ka jivan parichay , jaishankar prasad ka jivan parichay in hindi इसलिए आज मैं आपको उनके बारे में बताऊंगा।

चलिए शुरू करते हैं

जयशंकर प्रसाद जी के बारे में जानकारी | Jai shankar prasad biography in hindi | jaishankar prasad ji ka jivan parichay

 Jai shankar prasad biography in hindi

जयशंकर प्रसाद जी का जन्म 30 जनवरी 1890 में भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य में काशी जो वर्तमान में वाराणसी के नाम से जाना जाता है वहां पर हुआ था उनके पिता का नाम देवी प्रसाद साहू था तथा इनकी माता का नाम शमुन्नी देवी था। जयशंकर प्रसाद के पिता पूरे वाराणसी में सर्वाधिक दान देने के लिए प्रसिद्ध थे एवं उनके पिता का व्यापार इत्र जर्दा इत्यादि था उनके पिता के पास कई सारे लोग कार्य के लिए आते हैं। जब कोई उनके पास कार्य करने लगता था तब उनके सारी जिम्मेदारी उनके पिता ही उठाते थे।

जयशंकर प्रसाद के पिता कलाकारों की बहुत इज्जत किया करते थे। जयशंकर प्रसाद बहुत ही कम उम्र में बहुत बड़ी समस्या से जूझ है जो थी की 8 वर्ष की आयु में उनकी माता का देहांत हो गया तथा 10 वर्ष की आयु तक उनके पिता का देहांत हो गया जिस वजह से वह 10 वर्ष की आयु में ही अनाथ हो चुके थे। जयशंकर प्रसाद बचपन से ही बहुत हिम्मतवर थे जिस वजह से उनके सामने इतनी बड़ी समस्या आने के बावजूद भी उन्होंने खुद को संभाला।

और वह जब अपनी किशोरावस्था में पहुंचे तब उनके बड़े भाई का भी देहांत हो गया जिस वजह से उनको बहुत समस्या का सामना करना पड़ा। जयशंकर प्रसाद की आरंभिक शिक्षा क्वींस कॉलेज में हुई तत्पश्चात उनको घर पर ही शिक्षा देने का प्रबंध किया गया।

जयशंकर प्रसाद जी ने फारसी संस्कृत हिंदी एवं उर्दू जैसे विषयों को बहुत ही अच्छे से अध्ययन किया है इनके गुरु दीनबंधु ब्रह्मचारी जो संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे वह उनके संस्कृत के अध्यापक थे जिस वजह से जयशंकर प्रसाद जी ने वेद इतिहास पुराण एवं साहित्य शास्त्र का बहुत ही गहराई से अध्ययन किया है।

उनके पिता की मृत्यु के पश्चात जयशंकर प्रसाद के पिता द्वारा कर रहे व्यापार का बागडोर उनके रिश्तेदारों ने अपने हाथों में लिया लेकिन उनमें से कोई भी उनके व्यापार को संभालना सका और उनका व्यापार पूरी तरह से नष्ट हो गया तथा सन 1930 के समय तक जयशंकर प्रसाद के ऊपर ₹100000 का कर्ज हो गया और तत्पश्चात उन्होंने पुनः कड़ी मेहनत की और अपने उस व्यापार को अच्छा कर दिया एवं उसके बाद ही वह साहित्य की ओर बढ़ने लगे।

जयशंकर प्रसाद का पहला विवाह विंध्यवासिनी नाम की लड़की से किया गया लेकिन दुर्भाग्यवश हुआ 1916 में ही टीवी की बीमारी से मर गई जिस वजह से वह पुनः अकेले हो गए लेकिन उनकी भाभी ने उनका पुनः विवाह कराया तब उनकी दूसरी पत्नी का नाम कमलादेवी था इन दंपति को सन 1922 में एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम इन्होंने रत्न शंकर रखा।

जयशंकर प्रसाद की रुचि साहित्य और कला में अत्यधिक होने लगी थी क्योंकि उनके घर का वातावरण ही इस तरह से था कि उनकी रूचि साहित्य में बढ़ने लगी जिस वजह से मात्र 9 वर्ष की उम्र में उन्होंने रसमय सिद्ध लिख कर दिखाया जाए ब्रजभाषा में उन्होंने लिखा था। इसके साथ साथ जयशंकर प्रसाद को भोजन बनाने एवं शतरंज खेलने का बेहद शौक था।

जयशंकर प्रसाद की पहली रचना जिसका नाम खोलो द्वार था 1914 में प्रकाशित की गई। जयशंकर प्रसाद उस समय चल रहे पारसी रंगमंच की परंपरा को स्वीकार करने से इनकार करते हुए अपने भारत देश की चरित्रों को सामने लाते हुए कई नाटकों की रचना किए। उनके नाटक स्कंद गुप्त था चंद्रगुप्त जैसी रचनाओं को पढ़ते समय ऐसा लगता था कि जैसे या हमारे देश को जगाने के लिए ही लिखी गई हो उनका देश प्रेम उनके स्वर मैं पूरी तरह से झलक रहे थे।

जयशंकर प्रसाद की कविताएं

जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखी गई कविताओं की लिस्ट बहुत अत्यधिक है जिस वजह से हम आपको इसमें बस उनके द्वारा लिखी गई कुछ प्रसिद्ध कविताओं के बारे में ही बताएंगे जैसे कि :

पेशोला की प्रतिध्वनि
शेरसिंह का शस्त्र समर्पण
अंतरिक्ष में अभी सो रही है
मधुर माधवी संध्या में
ओ री मानस की गहराई
निधरक तूने ठुकराया तब
अरे!आ गई है भूली-सी
शशि-सी वह सुन्दर रूप विभा
अरे कहीं देखा है तुमने
काली आँखों का अंधकार
चिर तृषित कंठ से तृप्त-विधुर
जगती की मंगलमयी उषा बन
अपलक जगती हो एक रात
वसुधा के अंचल पर
जग की सजल कालिमा रजनी
मेरी आँखों की पुतली में
कितने दिन जीवन जल-निधि में
कोमल कुसुमों की मधुर रात

इनके द्वारा लिखे गए नाटक

स्कंदगुप्त
चंद्रगुप्त
ध्रुवस्वामिनी
जन्मेजय का नाग यज्ञ
एक घूंट
विशाख
अजातशत्रु
राज्यश्री
कामना

इनके द्वारा लिखी गईं कहानियां

छाया
प्रतिध्वनि
आकाशदीप
आंधी
इन्द्रजाल

इनके द्वारा लिखे गए उपन्यास

कंकाल
तितली
इरावती

जयशंकर प्रसाद जी द्वारा लिखी गई कई सारी रचनाएं वर्तमान समय के बच्चों के किताबों में दी जाती है तथा उनको जयशंकर प्रसाद जी की जीवनी एवं उनके रचनाओं के बारे में भी पढ़ाया जाता है

मृत्यु

जयशंकर प्रसादअपने जीवन की समस्याओं से लड़ते हुए उन्होंने खुद की स्वास्थ्य का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखा जिस वजह से उन्हें क्षय रोग हो गया जिस वजह से वह मात्र 48 वर्ष की आयु में ही दुनिया से अलविदा कह दिए।

जयशंकर प्रसाद की मृत्यु 15 नवंबर 1937 में हुई थी।इतने कम उम्र में ही उन्होंने कई सारे बड़े कार्य एवं इतनी महान रचनाओं से हमें वाकिफ कराया।

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निष्कर्ष

हमने आपको इस ब्लॉग में बताया jai shankar prasad biography in hind। अगर आप को उनके बारे में जानकर अच्छा लगा हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ की साझा करें और यदि आपको कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं हम आपको आपके सवाल का जवाब अवश्य ही देंगे।

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