लोकमान्य तिलक के बारे में जानकारी 2021 | Lokmanya Tilak Information In Hindi

दोस्तों आज मैं आपको इस ब्लॉक में बताने वाला हूं लोकमान तिलक जी के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है lokmanya tilak information in hindi। लोकमान्य तिलक के बारे में बहुत सारे लोगों को पता है और कुछ लोग इनके बारे में अभी तक नहीं जानते हैं इसलिए मैं आपको इस ब्लॉग में उनके बारे में बता रहा हूं ताकि आपको भी पता चले। गूगल पर बहुत सारे सर्च होते रहते हैं जैसे कि information about lokmanya tilak in hindi , information of lokmanya tilak in hindi

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लोकमान्य तिलक के बारे में जानकारी 2021 | Lokmanya Tilak Information In Hindi

लोकमान्य तिलक का जन्म 23 जुलाई 18 56 में महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिखली गांव में हुआ था। लोकमान्य तिलक एक ऐसे व्यक्ति थे जो आधुनिक कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी अर्थात यह पहली पीढ़ी थी जो आधुनिक शिक्षा प्राप्त की थी और लोकमान्य तिलक जी ने कई स्कूलों और कॉलेजों में गणित पढ़ाया था। लोकमान्य तिलक जी अंग्रेजी के शिक्षकों की बहुत आलोचक थे वह उन लोगों को पसंद नहीं किया करते थे उनका ऐसा मानना था कि यह भारतीय सभ्यता के विपरीत पढ़ाते हैं और हमारी सभ्यता का नाता सिखाते हैं लोकमान्य तिलक जी ही थे जो दक्कन शिक्षा सोसायटी की स्थापना की थी ताकि हमारे भारत की शिक्षा का स्तर सुधर जाए।

लोकमान्य तिलक ने दो समाचार पत्रों की शुरुआत की जो जनता में बहुत लोकप्रिय हुआ उसका नाम था अंग्रेजी में मराठा व मराठी में केसरी था। लोकमान्य तिलक हमारी भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना तथा क्रूरता काव्य और करने वाले अंग्रेजी शासन के बहुत आलोचक थे उनकी मांग थी कि ब्रिटिश सरकार तुरंत भारतीयों को पूर्ण स्वराज्य दे दे और यह उनके समाचार पत्र में छपने की वजह से उनको कई बार जेल भी जाना पड़ा।

लोकमान्य तिलक ने भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए थे लेकिन उन्होंने कांग्रेस के नरमपंथी रवैया के विरुद्ध बोलना शुरू किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 2007 में दो दलों में विभाजित हो गया एक दल का नाम था गरम दल और दूसरे दल का गरम दल गरम दल में लोकमान्य तिलक भी थे और उनके साथ लाला लाजपत राय और श्री विपिन चंद्र पाल शामिल थे इन तीनों के समूह को लोग लाल बाल पाल के नाम से जानने लगे। तिलक ने क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी और क्रांतिकारी खुदीराम बोस के बम हमले का समर्थन किया सन उन्नीस सौ आठ में इस वजह से उनको जेल में डाल दिया गया हुआ वर्तमान समय में म्यांमार में स्थित मांडले जेल थी।

लोकमान्य तिलक ने अपने समाचार पत्र केसरी में एक लेख लिखा और उसका शीर्षक उन्होंने लिखा था देश का दुर्भाग्य जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार की नीतियों का विरोध किया था जिस वजह से उनको भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए के अंतर्गत राजद्रोह करने के आरोप में 27 जुलाई 18 सो 97 में गिरफ्तार कर लिया गया और उनको म्यांमार के मांडले जेल में 6 वर्षों की कठोर कारावास की घोषणा की गई।

124 एbधारा ब्रिटिश सरकार द्वारा 1870 में जोड़ी गई थी जिस धारा के अंतर्गत लोकमान्य तिलक को 6 वर्ष की सजा हुई थी इस धारा में ब्रिटिश सरकार ने यह प्रावधान किया था कि भारत में विधि द्वारा स्थापित ब्रिटिश सरकार के प्रति जो भी व्यक्ति विरोध करेगा उनको राजद्रोह के आरोप में तीन से आजीवन काल तक की सजा और देश से निकाला जाने तक की सजा दी जाएगी। पश्चात ब्रिटिश सरकार ने 1898 में 124 ए संशोधन किया और दंड संहिता में नई धारा जोड़ दी। वह धारा 153 ए इस धारा के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति सरकार के मान हीन करता है तथा नफरत फैलाता है या अंग्रेजों के विरुद्ध घृणा का प्रचार करेगा तो वह उन सभी को विरोधी माना जाएगा और वह भी ठंड के हकदार हैं।

लोकमान्य तिलक जी एक ऐसे व्यक्ति थे जो ब्रिटिश राज के दौरान पूर्ण स्वराज मांगने की आवाज उठाई थी। जन जागृति का कार्यक्रम पूरे महाराष्ट्र के लिए गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव सप्ताह भर मनाना लोकमान्य तिलक जी नहीं शुरू किया था।

स्टार के माध्यम से लोकमान्य तिलक अपने देश की जनता के मन में एक दूसरे के प्रति देशप्रेम और अंग्रेजों के अन्याय के विरुद्ध खड़ा होने और लड़ने का साहस भरता था। जब अंग्रेजों ने लोकमान्य तिलक जी को 6 वर्ष का कारावास की सजा सुनाई थी उस के दौरान लोकमान्य तिलक जी ने वहां पर कुछ किताबें की मांग की लेकिन ब्रिटिश सरकार ने उस पर रोक लगा दिया कि किसी भी तरह का पत्र नहीं लिखा जाएगा जिससे राजनैतिक गतिविधियां हो।

जब वो कारावास में थे तब उन्होंने एक किताब लिखी और जब लोकमान तिलक जी का कारावास समाप्त हुआ उसके पहले ही बाल गंगाधर तिलक की पत्नी का स्वर्गवास हो चुका था उसका उन्हें एक पत्र प्राप्त हुआ। उसके पश्चात जब बाल गंगाधर तिलक जेल से बाहर आए तब उन्होंने एनी बेसेंट की मदद से होम रूल लीग की स्थापना की। जिस वजह से बाल गंगाधर तिलक बहुत प्रसिद्ध हुए। इसी आंदोलन के दौरान उन्हें लोकमान्य की उपाधि मिली। होम रूल लीग के स्थापना 1916 में की गई थी और इसका एक मुख्य कारण था कि स्वराज्य स्थापित करना इस आंदोलन में 5 लोगों की दुकड़िया बनाई गई थी जो पूरे भारत देश में बड़े-बड़े वकीलों और राजनेताओं को इसके बारे में बताते और उन को जागरूक करते थे।

लोकमान्य तिलक की मृत्यु 1 अगस्त 1920 में मुंबई में हुई थी उनके मरने के बाद महात्मा गांधी ने आधुनिक भारत का निर्माता और जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें भारतीय क्रांति का जनक बोला। लोकमान्य तिलक द्वारा लिखी गई कई सारी पुस्तकें हैं मैं आपको उनके बारे में बताता हूं। द ओरिजन द अंटार्कटिक होम ऑफ द वेदार श्रीमद्भागवत गीता रहस्य यह पुस्तकें लोकमान्य तिलक द्वारा लिखी गई थी और भी कई पुस्तकें हैं जो कोकणा पश्चिम महाराष्ट्र में चलती हैं। मराठी भाषा में एक नारा दिया था वह था स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको इस ब्लॉक में बाल गंगाधर तिलक के बारे में बताया lokmanya tilak information in hindi। अगर आपको यह जानकर अच्छा लगा हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यद्यपि आप चाहते हैं कि हम किसी ने विषय पर भी आपको जानकारी दे तो आप उसके लिए हमें कमेंट कर सकते हैं और अपना सवाल भी हमें कमेंट में पूछ सकते है

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