महाराणा प्रताप के बारे में जानकारी 2021 | Maharana pratap information in hindi

दोस्तो आज मैं आप को इस ब्लॉग में बताने वाला हु महाराणा प्रताप के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है maharana pratap information in hindi। महाराणा प्रताप के बारे में बहुत कम लोग जानते है जिस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते है जैसे की information about maharana pratap in hindi , maharana pratap history in hindi। इसलिए मैं आप को संपूर्ण जानकारी दूंगा।

तो चलिए शुरू करते है।

महाराणा प्रताप के बारे में जानकारी | Maharana pratap information in hindi | information about maharana pratap in hindi

INFOGYANS

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 में हुआ था। लेकिन इनके जन्म स्थान पर दो तरह की विचारधाराएं बनी हुई है कुछ लोग कहते हैं कि महाराणा प्रताप का जन्म कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था एवं कई लोगों का मानना है कि उनका जन्म पाली के राज महलों में हुआ था।

महाराणा प्रताप की माता का नाम महारानी जयवंता बाई थी तथा उनके पिताजी का नाम उदय सिंह द्वितीय था महाराणा प्रताप ने भीलो के साथ ही वह कई तरह की युद्ध कला शिखा करते थे भीला महाराणा प्रताप को कीका के नाम से बुलाता था क्योंकि भील अपने पुत्र को कीका कह कर पुकारते हैं। महाराणा उदय सिंह की दूसरी पत्नी धीरबाई जिनको हम वर्तमान समय में भटियाणी अर्थात इतिहास में उनका नाम भटियाणी से जाना जाता है वह अपने पुत्र को मेवाड़ का उत्तराधिकारी बनाने की इच्छा थी लेकिन प्रताप के उत्तराधिकारी होने पर उन्होंने विरोध किया जिस वजह से कुंवर जगमाल जो धीर बाई के पुत्र थे वह अकबर के खेमे में चले जाते थे।

महाराणा प्रताप का दो राज्याभिषेक हुआ था प्रथम राज्य अभिषेक 28 फरवरी 1572 में गोगुंदा में हुआ था लेकिन राज के पुरोहित एवं पंडितों के अनुसार पूरे विधि विधान के साथ राज्याभिषेक 1572 ईस्वी में कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ।

इस राज्याभिषेक में शासक राव चंद्रसेन भी उपस्थित थे जो जोधपुर के राठौड़ शासक थे। महाराणा प्रताप ने कुल 11 शादियां करी। उनके पत्नियों के नाम तथा उनसे प्राप्त होने वाले पुत्रो के नाम यह हैं।

महारानी अजबदे पंवार :- अमरसिंह और भगवानदास
अमरबाई राठौर :- नत्था
शहमति बाई हाडा :-पुरा
अलमदेबाई चौहान:- जसवंत सिंह
रत्नावती बाई परमार :-माल,गज,क्लिंगु
लखाबाई :- रायभाना
जसोबाई चौहान :-कल्याणदास
चंपाबाई जंथी :- कल्ला, सनवालदास और दुर्जन सिंह
सोलनखिनीपुर बाई :- साशा और गोपाल
फूलबाई राठौर :-चंदा और शिखा
खीचर आशाबाई :- हत्थी और राम सिंह

महाराणा प्रताप जब अपने शासनकाल में थे तब सम्राट अकबर उनको अपने अधीन बनाना चाहता था बिना युद्ध किए जिस वजह से सम्राट अकबर ने 4 दूतों को नियुक्त किया था जो महाराणा प्रताप को समझाने जा रहे थे उन चारों दूधों का नाम था मानसिंह भगवान दास तथा राजा टोडरमल जलाल खा।

लेकिन महाराणा प्रताप ने इन चारों राजदूतों को निराश कर दिया और खुद को राजा अकबर के आज ही करने से इनकार किया जिस वजह से वर्तमान समय में जाना जाने वाला बहुत ही ऐतिहासिक युद्ध हल्दीघाटी का युद्ध हुआ यह युद्ध 18 जून 1576 ईस्वी में मेवाड़ तथा मुगलों के बीच हुआ था। इस युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से 3000 घुड़सवार और 400 भील धनुर्धारी थे जबकि मुगलों के पास 5000 से 10000 लोगों की सेना थी।

महाराणा प्रताप की सेना ने मुगल की सेना को भागने पर मजबूर कर दिया था और मुगलों की सेना भागने लगी थी। महाराणा प्रताप ने छापामारी रणनीति का सहारा लेते हुए मुगल पर आक्रमण किया इस युद्ध में पहाड़ियों का उपयोग करते हुए महाराणा प्रताप ने मुगल सम्राट के कई सारे सैनिकों को मार गिराया। महाराणा प्रताप यह चाहते थे कि मुगल की सेना कभी भी शांति से ना रह पाए उनको शांति नहीं मिलनी चाहिए। जिस वजह से सम्राट अकबर ने तीन विद्रोह किए और महाराणा प्रताप को पहाड़ियों में छुपाने की भी कोशिश की इस दौरान भामाशाह के सहानुभूति के रूप में वित्तीय सहायता मिली।

राजस्थान और हमारे भारत के इतिहास में सन 1582 के दिवेर का युद्ध बहुत ही महत्वपूर्ण युद्ध माना गया है क्योंकि इस युद्ध में हमारे महाराणा प्रताप ने अपने उन राज्यों को पुनः प्राप्त किया था जिसको उन्होंने खो दिया था इसके पश्चात मुगलों और राणा प्रताप के बीच में एक बहुत ही लंबा संघर्ष युद्ध घटित हुआ यही कारण है कि कर्नल जेम्स टॉड ने मेवाड़ का मैराथन नाम दिया युद्ध को।

दिवेर थाने के अधिकारी सुल्तान खान को महाराणा प्रताप की तरफ से कुंवर अमर सिंह में घेर लिया और उस अधिकारी पर उन्होंने ऐसा हमला किया कि उनका भाड़ा सुल्तान खान को चीरता हुआ घोड़े के शरीर के आर पार हो गया जिस वजह से वह दोनों की मृत्यु से स्थान पर हो गई इसी तरह महाराणा प्रताप में बहलोल खान और उसके घोड़े का युद्ध से नाम मिटा दिया। महाराणा प्रताप के सैनिकों में से एक राजपूत सरदार ने अपनी तलवार से भारी भरकम शरीर वाले हाथी के पिछले पैर को काट दिया था जिस वजह से मेवाड़ उस युद्ध में विजई रहे।

या युद्ध महाराणा प्रताप के लिए बहुत अधिक कारगर साबित हुआ जिससे मुगल थाने जो सक्रिय या निष्क्रिय अवस्था में मेवाड़ में मौजूद थे उनकी संख्या 36 थी और इस युद्ध के बाद वह सभी वहां से हटा दी गई। इसी तरह पूरे मेवाड़ पर महाराणा प्रताप का अधिकार हो गया दिवेर की विजय ने यह प्रमाणित कर दिया था कि महाराणा प्रताप का स्वर संकल्प और वंश गौरव अमित है।

इस युद्ध में यह भी प्रमाणित कर दिया कि महाराणा प्रताप के त्याग और बलिदान की भावना के नैतिक बल ने सम्राट अकबर जैसे सत्तावादी नीति को भी परास्त कर दिया। 1579 से लेकर 1585 तक हमारे पूर्वी भारत उत्तर प्रदेश बंगाल बिहार और गुजरात के यहां पर मुगलों का अधिकार था उस प्रदेशों में विद्रोह आरंभ हो गया था जिस वजह से अकबर उस विद्रोह को दबाने में उलझ गया और इधर महाराणा प्रताप एक के पश्चात एक गढ़ जीतने जा रहे थे और इसी कारणवश मुगलों का दबाव में वार्ड से कम होने लगा ऐसा अवसर देखकर महाराणा प्रताप ने सन 1585 में मेवाड़ मुक्त पर या या नो को और भी तेज कर दिया और महाराणा प्रताप की सेना ने मोबाइल चौकियों पर आक्रमण किया जिस वजह से 36 महत्वपूर्ण स्थानों पर फिर से महाराणा प्रताप का अधिकार हुआ।

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निष्कर्ष

दोस्तों हमने आपको इस ब्लॉग में लिखकर बताया maharana pratap information in hindi। अगर आपका कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं।

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