महात्मा ज्योतिबा फुले के बारे में जानकारी 2021 | Mahatma jyotiba phule information in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में बताने वाले हैं महात्मा ज्योतिबा फुले के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है mahatma jyotiba phule information in hindi। ज्योतिबा फुले के बारे में बहुत सारे लोगों को नहीं पता है जिस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि jyotiba phule in hindi | jyotiba phule biography in hindi इसलिए मैं आज आपको इनके बारे में संपूर्ण जानकारी दूंगा

तो चलिए शुरू करते

महात्मा ज्योतिबा फुले के बारे में जानकारी | Mahatma jyotiba phule information in hindi | jyotiba phule in hindi

INFOGYANS

महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म पुणे में सन 18 सो 27 ईस्वी में हुआ था उनका जब जन्म हुआ उसके 1 वर्ष पश्चात इनके माता का निधन हो गया इस वजह से उनका लालन-पालन इनके घर पर काम करने वाली एक महिला ने किया। इनके माता का नाम चिमना फुले तथा उनके पिताजी का नाम गोविंदराव था सतारा से आकर यह लोग पुणे में फूल के गजरे आदि बनाने का कार्य किया करते थे। यह स्वयं को फुले के नाम से जाना जाता है।

ज्योतिबा फुले ने कुछ समय पहले मराठी में अध्ययन किया था और उसके पश्चात इनकी पढ़ाई छूट गई फिर यह 21 वर्ष की आयु में अंग्रेजी के सातवीं कक्षा की पढ़ाई को पूर्ण किया। ज्योतिबा फुले की शादी सावित्रीबाई से कराई गई सन 18 सो 40 ईस्वी में। सावित्रीबाई भी एक बहुत ही प्रसिद्ध समाज सेविका थी यह दोनों पति पत्नी ने दलित एवं महिलाओं को शिक्षित करने के लिए कई सारे कार्य एवं आंदोलन की।

दोनों पति पत्नि ने महिलाओं एवं दलितों के लिए कई सारे कार्य किए विधवाओं की पुनः शादी कराने का इन्होंने एक आंदोलन शुरू किया और महिलाओं को शिक्षित करने के लिए जो उस समय में वंचित था इसलिए इन्होंने सन 1848 में महिलाओं के लिए एक महिला विद्यालय शुरू किया। उच्च विद्यालय में जब सावित्रीबाई फुले पढ़ने जाया करती थी तब लोग उनके ऊपर कीचड़ एवं अन्य गंदे पदार्थ फेंका करते थे ताकि वह उन दलित महिलाओं को ना पढ़ाएं। और वह विद्यालय हमारे देश का पहला महिला विद्यालय था।

समाज एवं गांव के लोगों ने इन दोनों पति-पत्नी को रोकने के लिए कई सारे कार्य किए परंतु उन्होंने अपने कार्य को पीछे नहीं हटाया और आगे बढ़ते गए गांव और समाज वालों ने मिलकर उनको घर से निकलवा दिया लेकिन फिर भी इन लोगों ने अपना कार्य बंद नहीं किया और उसके कुछ दिन पश्चात ही इन्होंने महिला एवं बालिकाओं के लिए तीन अन्य विद्यालय खोलें।

ज्योतिबा फुले को महात्माओं और संतों की जीवनिया अर्थात उनके जीवन के बारे में पढ़ना बहुत ही आनंदमय और उनकी रूचि थी जिस वजह से उनको यह बात ज्ञात हुई कि जब भगवान के सामने सभी महिला पुरुष अर्थात नर नारी एक समान है तो हम मनुष्य कौन होते हैं ऊंच-नीच का भेदभाव करने वाले।

ज्योतिबा फुले ने सन 18 सो 73 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की जो निर्धन निर्मल एवं दलित वर्ग के लोगों को न्याय दिलाने का कार्य किया करती थी उनके इस महान समाज सेवा को देखकर सन 18 सो 78 में मुंबई की सभा में उन्हें महात्मा की उपाधि दी गई जिस वजह से इनका नाम महात्मा ज्योतिबा फूले पड़ा।

ज्योतिबा फुले ने बिना किसी ब्राह्मण एवं पुरोहित के विवाह संस्कार आरंभ कराया और इसको उन्होंने हमारे भारत देश के मुंबई राज्य के उच्च न्यायालय से मान्यता प्राप्त करवाई ज्योतिबा फुले एवं उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले बाल विवाह का विरोध किया करते थे और सती प्रथा के खिलाफ इन दोनों ने कई सारे विद्रोह की।

बाल विवाह को रोकने और विधवाओं का पुनर विवाह करवाने की चेष्टा से इन्होंने कई सारे कार्य किया और यह अपने मकसद में कामयाब भी रहे जिस वजह से वर्तमान समय में हमें बाल विवाह देखने नहीं मिलता और विधवाओं की पुनः शादी करने की अनुमति हमारे समाज द्वारा दी गई है।

ज्योतिबा फुले अपने जीवन में कई पुस्तकों की रचना की जिनमें से गुलामगिरी तृतीय रत्न छत्रपति शिवाजी राजा भोसला का पखड़ा किसान का कोडा अछूतों की कैफियत। यह दोनों हमारे देश के समाज के सभी कार्यों के प्रति बहुत विरोध किया करते थे जिस वजह से इनको ब्रिटिश सरकार के कार्य अच्छे लगते थे और वहां की परंपराएं उनको बहुत पसंद आती थी क्योंकि वहां पर छुआछूत स्त्रियों को शिक्षा प्राप्त करने की पाबंदी नहीं थी जिस वजह से यह उनका कई बार समर्थन भी किए हैं।

ज्योतिबा फुले मैट्रिक्स पास थे जिस वजह से उनके घर वालों की है इच्छा थी कि यह कोई सरकारी कर्मचारी बने और अच्छी वेतन प्राप्त करें लेकिन ज्योतिबा फुले अपना सारा जीवन दलितों एवं अछूत लोगों को न्याय दिलाने के बारे में निश्चय किया था और उस समय के समाज में महिलाओं को सिर्फ घर के कार्य करने की अनुमति दी गई थी जिस वजह से महिलाएं पढ़ लिख नहीं पाती थी उनका मानना था कि स्त्री एवं पुरुष दोनों एक समान है जिस वजह से यह सब भी समाज के ऊपर सवाल उठाया।

उस समय की सती प्रथा उनके मन पर बहुत गहरा प्रभाव डाली क्योंकि यदि किसी बालिका की शादी के कुछ दिन पश्चात उनके पति की मृत्यु हो जाती थी तो उनको भी उनके पति के साथ जिंदा जला दिया जाता था जो इन फूले दंपति को बिल्कुल भी पसंद नहीं आई और उन्होंने इस को सुधारने का निश्चय किया।

ज्योतिबा फुले ने सन 18 सो 51 में एक स्कूल का निर्माण किया जहां पर जाति धर्म एवं पंथ के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं था वहां पर किसी भी वर्ग के बच्चे पढ़ सकते थे। हिना फुल एवं बंदे को किसी भी संतान की प्राप्ति नहीं हुई थी इस वजह से उन्होंने एक विधवा के बच्चे को गोद लिया। वह बच्चा बड़ा होकर डॉक्टर बना और अपने माता-पिता के साथ समाज सेवा करने लगा।

27 नवंबर 1890 को ज्योतिबा फुले ने अपने सभी चाहने वाले एवं हितेषी हो को बुलाया और कहा कि मैंने जिन कार्यों को करने के लिए अपने हाथ में लिया था मैं वह सभी पूर्ण कर चुका हूं और अब मेरा जाने का समय आ गया है मैं अपने पत्नी और बच्चे को आप सभी के हवाले करता हूं और इसके पश्चात उन्होंने अपना देह त्याग कर समाज को अलविदा कह दिया।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको एक ब्लॉग में लिखकर बताया mahatma jyotiba phule information in hindi। अगर आपका कोई सवाल हो तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं।

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