ममता बनर्जी जी के बारे में जानकारी 2021 | Mamta banerjee biography in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में ममता बनर्जी के बारे में बताने वाले हैं अर्थात आज का हमारा विषय है mamta banerjee biography in hindi। ममता बनर्जी का नाम हम सभी ने सुना है लेकिन उनके बारे में संपूर्ण जानकारी ना होने की वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि biography of mamta banerjee in hindi , mamta banerjee wikipedia in hindi

तो चलिए शुरू करते हैं

ममता बनर्जी जी के बारे में जानकारी | Mamta banerjee biography in hindi | biography of mamta banerjee in hindi

mamta banerjee biography in hindi

ममता बनर्जी का जन्म ५जनवरी १९५५ में कोलकाता पश्चिम बंगाल में हुआ। ममता बनर्जी की माता का नाम गायत्री तथा उनके पिता का नाम प्रो मीलेश्वर बनर्जी था।ममता बनर्जी का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। ममता बनर्जी के अन्य 6 भाई और भी थे जिनका नाम अमित, अजीत, काली, बबन, गणेश तथा समीर थे।

ममता बनर्जी का शिक्षा।

ममता बनर्जी ने जय प्रकाश नारायण की गाड़ी पर चढ़कर निकम्मी सरकार के प्रति अपना विरोध व्यक्ति किया उस समय ममता बनर्जी कोलेज की छात्रा थी। ममता बनर्जी ने जोगमाया देवी कॉलेज में इतिहास विषय में स्नातक किया और दक्षिणी कोलकाता विश्वविद्यालय में इस्लामिक इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

इसके पश्च्यात जोगेश चन्द्र चौधरी लॉ कॉलेज, जो कोलकाता में मौजुद है वह से उन्होंने कानून की डिग्री भी हासिल किए।
ममताबैनर्जी ने अपने राजनीति सफर की शुरुआत कांग्रेश पार्टी से की।

ममता बनर्जी का राजनीतिक कैरियर

ममता बनर्जी सन 1976 से ले कर सन 1980 तक के लिए राज्य महिला कांग्रेस की महासचिव चुन ली गयीं। । सन 1984 में कोलकाता के जादवपुर लोक सभा क्षेत्र से उन्होंने चुनाव लडा वो भी उस समय के सबसे अनुभवी नेता सोमनाथ चटर्जी भी उस चुनाव के लिए खड़े थे और ये चुनाव जीत कर वे सबसे युवा भारतीय सांसद बन गई।

ममता द्वारा भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव पद पर भी कुछ दिन तक कार्यरत रही। सन 1991 में नरसिम्हाराव की सरकार में उनको मानव संसाधन, एवम युवा कल्याण खेलकूद और महिला-बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री चुनी गईं। जब सन 1996 में वो केंद्रीय मंत्री थी तब उन्होंने अपनी ही सरकार द्वारा पेट्रोल की कीमत बढ़ाए जाने पर विरोध किया।

आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पार्टी की गठबंधन

कांग्रेस से मतभेद चलते उन्होंने कांग्रेस पार्टी को छोड़कर उन्होंने अपनी खुद की एक दल शुरू किया। और उन्होंने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की ।
सन १९९९ ममता बनर्जी एन डी ए सरकार में शामिल हो गई।उन्हें केन्द्रीय रेल मंत्री के पद पर नियुक्त किया गया। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल की जनता से किए हुए ज्यादातर वादे को भी पूरे किए। वित्तीय वर्ष 2000-2001 के दौरान उन्होंने 19 नई ट्रेनों की घोषणा की गई। उन पर लगे कुछ आरोपों के चलते 2001 में उन्होंने एन.डी.ए. सरकार से भी गठबंधन को तोड़ दिया।

लेकिन 2004 में वे फिर से एन.डी.ए. से जुड़ीं और कोयला और खदान मंत्री पद को संभाला। 2006 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
ये ममता बनर्जी के पार्टी की सबसे बड़ी असफलता थी। इस के पश्यात तृणमूल कांग्रेस ने यूपीए सरकार से गठबंधन किया और ममता बनर्जी फिर एक बार रेल मंत्री बनाई गई। सन 2011 के विधानसभा चुनाव उनके राजनैतिक सफ़र में एक नया मोड़ शूरू हुआ।

चुनाव में तृणमूल कोंग्रेस की जीत के साथ ही 20 मई 2011 को ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्य मंत्री बनाईं गई।
कांग्रेस पार्टी से नाता तोड़ने के बाद ममता बनर्जी ने अपनी राजनैतिक पार्टी आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। उन्होंने टाटा मोटर्स के द्वारा कारखाने पर लगाये जाने का विरोध किया। पश्चिम बंगाल सरकार के 10000 एकड़ जमीन को विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने के प्रस्ताव को ममता बनर्जी ने जोरदार विरोध किया।

बतौर रेल मंत्री अपने सर्वप्रथम कार्यकाल के दौरान उन्होंने पर्यटन के विकास के लिए इंडियन रेल्वे केटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन (आई.आर.सी.टी.सी.) लिमिटेड का निर्माण किया ।
दिसम्बर सन 1998 में, ममता जी ने महिलाओं के लिए आरक्षण बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया ।लोक सभा में समाजवादी पार्टी के एक एमपी डोगरा प्रसाद सरोज जी की कालर पकड़कर एवं उन्हें घसीटते हुए बाहर निकाली ।जिसके चलते वे बहुत अधिक विवादों से घिरी गई थी।

ममता बनर्जी ने सन 2012 में यह कहा था, कि ‘पहले जब लड़के व लड़की के साथ में हाथ पकड़ कर घूमते थे, तो उस समय उनके माता – पिता द्वारा पकड़े जाने पर भी उनको फटकार लगाई जाती थी, ले किन इस समय सबकुछ खुलेआम होने लगा हैं। यह सब सिर्फ एक खुले बाजार की तरह हो गया हैं। इन्हीं कारणों से ममता बनर्जी को क ई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

ममता बनर्जी एक अच्छी राजनेता होने के साथ-साथ भी एक बहुत ही अच्छी लेखिका भी है। उन्होंने अनेकों प्रकार की पुस्तकें लिखी हैं। यह पुस्तके आज के समय में अनेकों प्रकार के नाम से प्रसिद्ध हैं जो कि नीचे निम्नलिखित है:

स्माइल (अंग्रेजी भाषा में)
अस्तित्व का संघर्ष (अंग्रेजी भाषा में)
लोकतंत्र की हत्या (अंग्रेजी भाषा में)
गहरा क्षितिज (अंग्रेजी भाषा में)
इंडोलानेर कथा (बंगाली भाषा में)
तृणमूल (बंगाली भाषा में)
उपलब्धि (बंगाली भाषा में)

ममता बनर्जी द्वारा जीते गये पुरस्कार।

2012 में टाइम पत्रिका ने उनका दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक के रूप मे बनाई गई तथा उसे वर्ष ब्लूमबर्ग मार्केट्स पत्रिका द्वारा वित्त की दुनिया में उनको 50 सबसे अधिक प्रभावशाली लोगों में एक चुना।

65 वर्षीय ममता बनर्जी ने विवाह नहीं किया है। ममता बनर्जी को पढ़ना, लिखना काफी पसंद था।
ममता बनर्जी ने अब तक कोई भी अपना उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी ही ममता बनर्जी के बाद टीएमसी की जिम्मेदारी संभालेंगे।

ममता बनर्जी के पास करीब 69 हजार 255 रुपये कैश है.।दरअसल नंदीग्राम विधानसभा चुनाव से पहले ये एफिडेबिट दाखिल हुआ।. तब उन्होंने बैंक अकाउंट में करीब 12 लाख, दो हजार 356 रुपये जमा करा दिया। ममता बनर्जी के पास नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) के रूप में 18 हजार 490 रुपये का नीवेश है ममता बनर्जी के पास मात्र नौ ग्राम की ज्वेलरी थी

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निष्कर्ष

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