मिल्खा सिंग जी के बारे में जानकारी 2021 | Milkha singh biography in hindi

दोस्तो अभी मैं आप को बताने वाला हु मिल्खा सिंग के बारे में बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है milkha singh biography in hindi। मिल्खा सिंग का नाम सभी ने सुना होगा लेकिन उनके बारे में पूरी जानकारी न होने की वजह से गूगल पर इस तरह के सर्च प्रतिदिन होते रहते है जैसे की milkha singh wikipedia in hindi , about milkha singh in hindi इसलिए मैं आप को बताने वाला हु

तो चलिए सुरु करते है।

मिल्खा सिंग जी के बारे में जानकारी | Milkha singh biography in hindi | milkha singh wikipedia in hindi

INFOGYANS

मिल्खा सिंग का जन्म 20 नवंबर 1921 में गोविंदपुर में हुआ था जो वर्तमान समय में पाकिस्तान में पड़ता है। इनका परिवार सिख जाट परिवार था। जब भारत का विभाजन किया जा रहा था तब मिल्खा सिंग के माता पिता की मृत्यु हो गई।उसके पश्चात वो पाकिस्तान से भारत आ गए। उसके मिल्खा सिंग ने अपने जीवन में कुछ करने की ठानी।

उसके पश्चात से मिल्खा सिंग सेन में भारती के लिए कोसिस करना सुरु किए और अंततः उन्होंने ने सन 1952 में सेना की विद्युत मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में होने में सफलता प्राप्ति की। मिल्खा सिंग के सशस्त्र बल के कोच जिनका नाम हवीलदार गुरुदेव सिंह था उन्होंने मिल्खा सिंग को भागने के लिए प्रेरित किया। उस बाद से मिल्खा सिंग कड़ी मेहनत करने लगे और सन 1956 में हुए पटियाला राष्ट्रीय खेल में मिल्खा सिंग सुर्खियों में आए।

मिल्खा सिंग भागने में बहुत प्रख्यात हुए क्युकी एक होनहार धावक के रूप में उनको लोग पहचानने लगे थे। उसके पश्चात मिल्खा सिंग ने 200 मीटर 400 मीटर की दौड़ में बहुत ही अच्छे से दौड़े और सफलता प्राप्त की और मिल्खा सिंह अभी तक के सबसे बेहतरीन धावक है हमारे राष्ट्र के और विश्व कीर्तिमान धावक के रूप में भी रहे है।

सन 1958 में संयुक्त साम्राज्य के कमनवेल्थ खेलो में मिल्खा सिंग को स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ और यह पहले व्यक्ति थे जो अपने लंबे बालों के साथ इस पदक को जीता था । इस खेल के बाद उनको पाकिस्तान में भी दौड़ने के लिए बुलाया गया लेकिन उनके साथ जो बचपन में हुआ था उस वजह से वो वहा जाने से हिचक रहे थे।

लेकिन फिर राजनैतिक उथल पुथल के डर की वजह से उन्होंने पाकिस्तान के इस न्यौते की स्वीकार कर लिया। और बहुत ही आसानी के साथ उन्होंने अपने साथ दौड़ रहे अन्य प्रतिनिधियों को बहुत ही आसानी से हरा दिया। वहा पर उनको फ्यालिंग सीख की उपाधि मिली क्युकी वहा की अधिकांस महिलाएं मिल्खा सिंग को देखने के लिए अपने नकाब उतार दी थे और कई पुरुष भी उनसे बहुत प्रभावित हुए।

सेवानिवृत्ति के पश्चात मिल्खा सिंग पंजाब में खेल निर्देशक के पद पर रहे। उसके बाद मिल्खा सिंग से खेल से सन्यास ले लिया और भारत के सरकार से मिल कर खेल को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन करके का कार्य करने लगे। मिल्खा सिंग के जीवन पर एक फिल्म भी बनी है जिसको चंडीगढ़ के बहुत ही प्रसिद्ध फिल्म निर्माता,निर्देशक,और लेखक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने सन 2013 में भाग मिल्खा भाग नाम की एक फिल्म उनके ऊपर बनाई जो बहुत जाता चर्चित रही।

उड़न सिख देश में होने वाले विविध खेलो के आयोजनों में शिरकत होने लगे इसलिए उन्होंने 30 नवम्बर सन 2014 में हैदराबाद में हुए जिओ मैराथन-2014 को झंडा दिखा कर खेल शुरू किया। मिल्खा सिंग कई खेलो में पदक जीते है और कई में वो प्रथम अंक प्राप्त किए है।

सन १९५८ में मिल्खा सिंग को एशियाई खेल में २०० तथा ४०० मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। उसी साल 1958 में मिल्खा सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक के विजेता रहे एशियाई खेल में 400 मीटर की रेस में प्रथम आए थे तथा 200 मीटर की रेस में भी वह प्रथम आए थे उसके पश्चात सन 1959 में मिल्खा सिंह को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया सन 1962 में एशियाई खेल में मिल्खा सिंह 400 मीटर तथा 4*400 रिले रेस में प्रथम आए थे।सन 1964कोलकाता के राष्ट्रीय खेलों में 400 मीटर की रेस में द्वितीय स्थान प्राप्त किए थे।

सिंह सिंह की पत्नी का नाम निर्मल कौर था इन दोनों की मुलाकात चंडीगढ़ में हुई थी जो साल 1955 में भारतीय महिला वॉलीबॉल दिल की कप्तान थी उसके पश्चात 1962 में मिल्खा सिंह तथा निर्मल कौर ने विवाह कर लिया और इनको चार बच्चों की प्राप्ति हुई जिनमें से 3 बेटियां थी तथा एक बेटा था जिसका नाम जीव मिल्खा सिंह रखा गया।

मिल्खा सिंह ने सन 1999 में एक 7 साल के बच्चे को गोद लिया जिसका नाम हवलदार विक्रम सिंह रखा लेकिन टाइगर हिल के युद्ध में वह शहीद हो गया।
मिल्खा सिंह ने कई शानदार रिकॉर्ड तथा उपलब्धियां दिया बनाई है। सन 1957 में मिल्खा सिंह ने 400 मीटर की दौड़ को मात्र 47 पॉइंट 5 सेकंड में पूरा करके एक के रिकॉर्ड अपने नाम किया।

जब मिलकर सिंह के माता पिता की मृत्यु हुई थी तब इनकी आयु केवल 12 वर्ष की थी मिल्खा सिंह प्रति 10 किलोमीटर अपने गांव से दूर स्कूल जाया करते थे। मिल्खा सिंह इंडियन आर्मी में जाने की चाहत रखते हुए कड़ी मेहनत की लेकिन वह तीन बार असफल हुए उसके पश्चात उनको सफलता हाथ लगी।

मिल्खा सिंह ने 200 मीटर की रेस को मात्र 6 सेकंड में पूरा किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मिल्खा सिंह ने अपना रिकॉर्ड उन्होंने खुद से तोड़ा सन 1958 में 4 मीटर की रेस को उन्होंने मात्र 16 सेकंड में पूरा करके गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भाग मिल्खा भाग फिल्म को सन 2014 की बेस्ट एंटरटेनमेंट फिल्म का पुरस्कार मिला मिल्खा सिंह ने जब उस फिल्म को देखा तो उनकी आंखों से आंसू निकल आ ये

मिल्खा सिंह को मई माह में करुणा नामक बीमारी हुई जो हमारे भारत देश में फैली हुई थी जिस वजह से उनकी तबीयत अचानक और भी खराब होने लगी इसके पश्चात 18 जून 2021 कि रात को 11:30 पर हमने अपना एक महान एथलीट खो दिया इनकी मृत्यु के पश्चात इनकी धर्मपत्नी की भी मृत्यु हो गई।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको ब्लॉग में लिखकर बताया milkha singh biography in hindi। अगर आपको या पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यदि आपका कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं हम आपके सवाल का जवाब अवश्य देंगे।

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