राजा राममोहन राय के बारे में जानकारी 2021 | Raja ram mohan roy information in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में बताने वाले हैं राजा राममोहन राय के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है raja ram mohan roy information in hindi। राजा राममोहन राय के बारे में सभी लोगों को संपूर्ण जानकारी नहीं है जिस वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि information about raja ram mohan roy in hindi , biography of raja ram mohan roy इसलिए मैं आज आपको इनके बारे में संपूर्ण जानकारी दूंगा।

तो चलिए शुरू करते हैं

राजा राममोहन राय के बारे में जानकारी | Raja ram mohan roy information in hindi | information about raja ram mohan roy in hindi

INFOGYANS

राजा राममोहन राय का जन्म 27 मई 1772 में बंगाल के एक हुगली जिले में राधा नगर गांव में हुआ था। राजा राममोहन राय ब्राह्मण परिवार से थे इनके पिताजी का नाम रामकंता तथा उनकी माता का नाम तारिणी था इनका परिवार धर्म के मामले में बहुत कट्टर थे।

राजा राममोहन राय जब 9 वर्ष के थे तब उनकी शादी कर दी गई थी । लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी पहली पत्नी का जल्द ही देहांत हो गया जिस वजह से उन्होंने दूसरा विवाह किया उनकी दूसरी पत्नी से उनको 2 पुत्र प्राप्त हुए लेकिन सन 1824 में उनकी दूसरी पत्नी का भी देहांत हो गया उनके दोनों पुत्रों का नाम राधा प्रसाद और रामाहाप्रसाद था । उनकी दूसरी पत्नी के देहांत के बाद उन्होंने तीसरी शादी की लेकिन वह भी अधिक समय तक जीवित नारायण सके।

राजा राममोहन राय बहुत बड़े विद्वान थे उन्होंने मात्र 15 वर्ष की आयु में बांग्ला पर्शियन अरेबिक और संस्कृत जैसी कठिन भाषाओं को भी सीख लिया था। राजा राममोहन राय संस्कृत और बंगाली भाषा में अपने प्रारंभिक शिक्षा आरंभ की थी यह इनके गांव के ही विद्यालय में हुई थी।

इसके पश्चात राजा राम मोहन राय को पटना के मदरसे भेज दिया गया जहां राजा राममोहन राय ने अरेबिक तथा पर्शियन भाषाओं को सिखा। संस्कृत की भाषा सीखने के लिए वह काशी तक गए थे जहां पर उन्होंने वेदों और उपनिषदों की पढ़ाई की इसके पश्चात जब वह 22 वर्ष के थे तब उन्होंने अंग्रेजी भाषा सीख ली थी।

राजा राममोहन राय अपने वेदों और उपनिषदों के अलावा बाइबल कुरान एवं अन्य इस्लामिक ग्रंथों का भी अध्ययन किया है। राजा राममोहन राय हिंदू पूजा और परंपराओं के विरुद्ध थे उन्होंने कुरीतियों और अंधविश्वासों का बहुत विद्रोह किया जो हमारे समाज में फैला हुआ था परंतु उनके पिता श्री एक पारंपरिक और कट्टर ब्राह्मण धर्म का पालन किया करते थे।

राजा राममोहन राय जब मात्र 14 वर्ष के थे तब उन्होंने अपने माता के समक्ष सन्यास लेने की इच्छा व्यक्त की परंतु उनकी मां ने यह बात मानने से इनकार कर दिया।

राजा राममोहन राय परंपरा विरोध और धार्मिक मान्यताओं का विरोध किया करते थे जिस वजह से उनके पिता तथा उनके बीच मतभेद रहने लगा जिस वजह से राजा राममोहन राय अपना घर छोड़कर हिमालय और तिब्बत के तरफ निकल दिए उसके पश्चात वह जब अपने घर लौट रहे थे उससे पहले उन्होंने पूरे देश दुनिया के साथ रह कर सत्य को जाना समझा और बहुत भ्रमण किया जिस वजह से धर्म के प्रति उनकी जिज्ञासा और बढ़ने लगी और वह घर लौट आए।

राजा राममोहन राय शादी के पश्चात भी वाराणसी जाकर उपनिषद और हिंदू दर्शनशास्त्र के बारे में अध्ययन किया उसके पश्चात उनके पिताजी का देहांत हो गया और वह 1803 में मुर्शिदाबाद लौट आए।

राजा राममोहन राय 1803 में हिंदू धर्म और उसमें शामिल विभिन्न अंधविश्वासों पर अपनी विचार धारणा प्रकट की। एकेश्वरवाद के सिद्धांत के अनुसार ईश्वर ही सृष्टि का निर्माता है इस मत को राजा राममोहन राय ने संस्कृत बंगाली हिंदी और इंग्लिश भाषा में अनुवाद करते हुए समझाया। मानव की जानकारी के बाहर और इस पूरे ब्रह्मांड और संसार को उसी शक्ति द्वारा नियंत्रित किया जाता है इस बात को उन्होंने अपने वेदों और उपनिषदों में समझाएं।

राजा राममोहन राय ने सन 1814 में आत्मीय सभा की स्थापना की जिसका उद्देश्य था धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर पुनर्विचार करके उनमें परिवर्तन किया जाए। राजा राममोहन राय ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए कई सारे कार्य के उन्होंने विधवा विवाह और महिलाओं के लिए जमीन संबंधित हक दिलाना था। राजा राममोहन राय ने सती प्रथा पर भी बहुत विरोध किया क्योंकि जब उनकी पत्नी की बहन सती हुई तब उनको यह बात बहुत बुरी लगी इस वजह से उन्होंने इसका कठोर विरोध किया उन्होंने बाल विवाह और बहु विवाह का भी विरोध किया।

राजा राममोहन राय ने इंग्लिश मीडियम स्कूल की स्थापना सन 1822 में किया था उनका मानना है कि इंग्लिश भाषा हमारे भारत के भाषा से अधिक उन्नत है और समृद्धि। राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरोध में विजय हासिल सन 18 सो 29 में किया। जिस वजह से सन 18 सो 29 से सती प्रथा पर रोक लग गया और वर्तमान समय में इस तरह की कोई भी पड़ता है हमारे देश में प्रचलित नहीं है।

राजा राममोहन राय जब ईस्ट इंडिया कंपनी में काम किया करते थे तब उन्होंने या विचार बनाया कि वेदांत के सिद्धांतों को पुनः प्रभावित किया जाना चाहिए। राजा राममोहन राय ने कोलकाता में हिंदू कॉलेज की स्थापना की जो कोलकाता का सर्वोच्च शैक्षिक संस्थान बन गया। राजा राममोहन राय ने भौतिक विज्ञान रसायन विज्ञान और वनस्पति शास्त्र को बहुत अत्यधिक प्रोत्साहन दिया क्योंकि वह चाहते थे कि हमारे देश के सभी बच्चे ने नई तकनीकों के बारे में जाने ताकि हमारी पीढ़ी और भी अधिक आगे बढ़े।

राजा राममोहन का ऐसा मानना था कि यदि हमारे देश के बच्चे गणित जियोग्राफी और लैटिन विषय को नहीं पड़ेंगे तो वह पीछे रह जाएंगे और उन्होंने अपने इस विचार को सरकार के सामने रखा और सरकार ने उनके इस विचार को स्वीकार किया लेकिन जब तक राजा राममोहन राय की मृत्यु नहीं हुई तब तक इसे लागू नहीं किया गया। राजा राममोहन राय ने सर्वप्रथम अपनी मातृभाषा के विकास के बारे में कई कार्य किया इस पर अधिक ध्यान दिया।

राजा राममोहन राय राजनीति स्वतंत्रता के पक्ष मे थे। राजा राममोहन राय के समय में बंगाली समाज कई कुरीतियों का सामना कर रही थी।

Read Also – Savitribai phule information in hindi

निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको इस ब्लॉग में लिखकर बताया raja ram mohan roy information in hindi। अगर आपको यह विषय पसंद आए तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें अगर यह भी आप हमसे किसी भी तरह का सवाल पूछना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट में पूछ सकते हैं।

Leave a Comment