संत ज्ञानेश्वर के बारे में जानकारी 2021 | Sant dnyaneshwar information in hindi

दोस्तो आज मैं आप को इस ब्लॉग में बताने वाला हु संत ज्ञानेश्वर जी के बारे में अर्थात आज का हमारा विषय है sant dnyaneshwar information in hindi। इनके बारे में बहुत कम लोगो को पता होगा इसलिए गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते है जैसे की sant dnyaneshwar information। इसलिए मैं आप को इनके बारे में संपूर्ण जानकारी दूंगा

तो चलिए शुरू करते है।

संत ज्ञानेश्वर के बारे में जानकारी | Sant dnyaneshwar information in hindi | sant dnyaneshwar information

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संत ज्ञानेश्वर का जन्म सन 1275 में महाराष्ट्र में स्थित औरंगाबाद जिले में गोदावरी नदी के किनारे आपेगाव में हुआ था जब उनका जन्म तब भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन हुआ। उनके पिता जी का नाम विठ्ठल पंत था तथा उनकी माता का नाम रूक्मिणी बाई था। संत ज्ञानेश्वर जी के पिता जी उच्च कोटि मुमुक्ष थे और साथ ही भगवान विठ्ठलनाथ के बहुत बड़े उपासक थे।

जब उनका विवाह किया गया था तब वह संन्यास दीक्षा ग्रहण किए थे परंतु उन्हें अपनी गुरुदेव के आज्ञा अनुसार पुनः गृहस्थाश्रम में प्रवेश करना पड़ गया था इस अवस्था में उनको 3 पुत्र और एक पुत्री प्राप्त हुई थी तीनों पुत्रों का नाम निवृत्तिनाथ ज्ञानदेव तथा सोपान था तथा उनकी पुत्री का नाम मुक्ताबाई था।

इन चारों भाइयों एवं बहनों को जन्म के दौरान से ही सन्यासी की संतान का अपमानजनक संबोधन सहना पड़ रहा था। संत ज्ञानेश्वर के पिताजी विट्ठल पंत को समाज द्वारा दी गई आज्ञा के अनुसार उनको अपनी देह त्याग करना पड़ा था।

पिता की छत्रछाया से वंचित होने पर यह सभी भाई-बहन कई सारे अरमानों को सहित है उसके पश्चात उन्होंने शुद्ध पत्र की प्राप्ति के लिए उस समय में बहुत विख्यात धर्म क्षेत्र पैठण में जा पहुंचे।

किंवदंती किस स्थान पर ज्ञानदेव ने भैंस के मुख से वेद उच्चारण कराया था उन ब्राह्मणों के सामने जो उनका मजाक उड़ा रहे थे।

ज्ञानेश्वर द्वारा लिखी गई कई सारी महान कृतियां सर्वमान्य उनमें से ज्ञानेश्वरी अमृतानुभव चांद देव पासठी तथा अभंग था। इनके द्वारा लिखी गई ज्ञानेश्वरी तथा अभंग इन रचनाओं के रचयिता एक ही नाम के दो अलग व्यक्ति हैं लेकिन कई पुष्ट आधारों पर यह बात सुनिश्चित हो गई कि यह दोनों बुक संत ज्ञानेश्वर द्वारा लिखी गई थी।

संत ज्ञानेश्वर द्वारा लिखी गई अभंग रचना बाल को और वृद्धों के मन में बहुत अधिक प्रतिबिंबित हुई उसमें ज्ञानेश्वर जी ने तत्व चर्चा की गहराइयों को ना नापते हुए एक सामान्य वाणी में जनता को अचार धर्म की शिक्षा प्रदान की थी। संत ज्ञानेश्वर जी एक बहुत ही महान संत और एक बहुत ही श्रेष्ठ कवि थे।

संत ज्ञानेश्वर जी की गणना संपूर्ण भारतवर्ष के महान संतों और एक मराठी कवियों में किया जाता है संत ज्ञानेश्वर जी हमारे भारत देश के महाराष्ट्र राज्य का भ्रमण पैदल चलकर लोगों को सत्य की ज्ञान की प्राप्ति कराया। संत ज्ञानेश्वर जी 13वीं सदी के बहुत ही महान संत थे।

संत ज्ञानेश्वर जी बहुत ही कम उम्र में बहुत सारी समस्याओं का सामना किए थे जब वह छोटे थे तब उनको जाट बहिष्कृत कर दिया गया था जिस वजह से उनको अपना जीवन यापन करने के लिए किसी भी तरह की सुख सुविधाओं का मिल पाना बहुत ही मुश्किल हो गया था ऐसे मुश्किल हालात में भी संत ज्ञानेश्वर जी की सी भी प्रकार से भयभीत नहीं हुए।

संत ज्ञानेश्वर जी के पिताजी जब अपना सन्यास त्याग कर गृहस्थ जीवन में पुनः प्रवेश किए थे तब समाज और गांव द्वारा उनको जाती बहिष्कृत कर दिया गया उनके पिताजी किसी भी तरह का प्रसिद्ध करने के लिए तैयार थे परंतु समाज द्वारा उनको देती याद करने को ही प्रसिद्ध बताया गया और साथ में यह भी कहा गया कि उनके द्वारा जंमें गए तीन पुत्रों को भी जनेऊ पहनने का हक नहीं है।

समाज द्वारा देह त्याग करने को ही प्रश्चित बताया जाने पर विट्ठल पंत जी ने अपनी पत्नी के साथ प्रयागराज के संगम में डूब कर अपने देव को त्याग दिया और इसी के साथ उनके बच्चे बिना मां बाप के हो गए और इतना करने के बाद उन गांव वालों का मन नहीं भरा और उन्होंने इन बच्चों को भी गांव से निकाल दिया जिस वजह से इन बच्चों को अपना जीवन यापन करने के लिए भीख मांगना पड़ा और उन्होंने भीख मांग कर अपना जीवन शुरू किया।

संत ज्ञानेश्वर जी कुछ दिनों बाद अपने बड़े भाई निवृत्तीनाथ तथा गांगीनाथ से मिले गांगीनाथ इन दोनों के गुरु होने के साथ-साथ इनके पिताजी के भी गुरु थे गुरु से निवृत्ति नाथ ने योग मार्ग की शिक्षा प्राप्त की थी। उनके गुरु ने निवृत्तिनाथ को भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करने का उपदेश दिया और संत ज्ञानेश्वर के बड़े भाई ने ज्ञानेश्वर जी को भी इस क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कराए।

संत ज्ञानेश्वर जी अपने ग्रंथ में लगभग 10000 से अधिक पदों का रचना किया है। यही कारण है की उन्हे पूरे भारत देश के महान संत और महान कवि माना जाता था। संत ज्ञानेश्वर जी जब 15 वर्ष के थे वह तभी से भगवान श्री कृष्ण के बहुत बड़े उपासक बन चुके थे। संत ज्ञानेश्वर जी जब अपने बड़े भाई से शिक्षा प्राप्त की तब वह मात्र 1 वर्ष के अंदर ही एक महाकाव्य पर लेख लिखना प्रारंभ कर दिया था और वह महाकाव्य भागवत गीता थी। उन्होंने इस महाकाव्य को अपने नाम पर दिखा उस ग्रंथ का नाम इन्होंने ज्ञानेश्वरी रखा जो वर्तमान समय में बहुत ही प्रसिद्ध ग्रंथ कहा जाता है और उन्होंने इस ग्रंथ को मराठी भाषा में लिखा है।

मराठी भाषा की सबसे प्रिय ग्रंथ ज्ञानेश्वरी को ही माना जाता है इन्होंने इस ग्रंथ में 10000 से भी अधिक पद्य का इस्तेमाल किया है। संत ज्ञानेश्वर जी की मृत्यु सन 1296 में हो गई थी अर्थात वह जब 21 वर्ष के थे तभी उनकी मृत्यु हो गई लेकिन कुछ लोगों का ऐसा कहना और मानना है कि संत ज्ञानेश्वर जी संसार की मोह माया को त्याग कर समाधि ले लिया है। संत ज्ञानेश्वर जी की समाधि आलंदी के सिद्धेश्वर के मंदिर में स्थित है। यह एक समाज सुधारक और महान कवि थे।

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको एक ब्लॉग में लिखकर बताया sant dnyaneshwar information in hindi अगर आपको इनके बारे में जानकारी अच्छा लगा हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यदि आपका कोई सवाल है तो आप हमसे बेझिझक कमेंट में पूछ सकते हैं हम आपके सवाल का जवाब अवश्य देंगे।

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