शाहजहां के बारे में जानकारी 2021 | Shah jahan history in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में शाहजहां के बारे में बताने वाले हैं अर्थात आज का हमारा विषय है shah jahan history in hindi| शाहजहां का नाम तो हम सभी ने लेकिन उनके कार्यों एवं जीवन शैली बारे में हमें संपूर्ण जानकारी ना होने की वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि shah jahan story in hindi ,history of shah jahan in hindi | इसलिए मैं आज आपको उनके बारे में संपूर्ण जानकारी दूंगा|

तो चलिए शुरू करते हैं

शाहजहां के बारे में जानकारी | Shah jahan history in hindi | shah jahan story in hindi

INFOGYANS

जहां का जन्म 5 जनवरी 1992 में लाहौर में हुआ था तथा उनकी माता का नाम जगत गोसाई था| शाहजहां कब बचपन में लोग खुर्रम के नाम से जानते थे एवं उनको खुर्रम के नाम से पुकारा जाता था| शाहजहां बल और छल के मदद से अपने पिता का उत्तराधिकारी बना| शाहजहां को बचपन से ही कई तरह की युद्ध कला एवं सारे रणनीतियां आती थी| शाहजहां को कला से बेहद प्रेम था और खास करके और स्थापत्य कला का शौकीन था|

शाहजहां का विवाह 20 वर्ष की आयु में आरजूमंद बानो से सन 1612 में हुआ लेकिन उनकी सगाई 15 वर्ष की आयु में ही हो गई थी| उनको 14 संताने प्राप्त हुई जिसमें से 6 की मृत्यु हो गई थी| मात्र 20 वर्ष की आयु में ही शाहजहां बेहद शक्तिशाली और बुद्धिमान गए थे जिस वजह से उनको जहांगीर का एक स्तंभ स्वरूप माना जाने लगा| सन 1648 में शाहजहा ने अपनी राजधानी आगरा से हटाकर दिल्ली कर दी शाहजहां की शान शौकत बहुत ही अधिक ठीक क्योंकि वह बहुत सारी कला एवं कार्यों के शौकीन थे| उनके दरबार में कई सारी सामग्रियां सजाई हुई रहती थी और वह जिस स्थान पर बैठते थे वहां पर कई सारी कलाएं एवं तरह तरह के वस्त्रों से रहता था उनके दरबार में जो व्यक्ति बैठता था वह खुद को बहुत ही धन्य समझता था क्योंकि उनके दरबार में बहुत ही कम लोगों को बैठने का अवसर प्राप्त होता था|

सिंहासन पाने के लिए शाहजहां ने कई तरह के चाल चली उसने अपनी पहली चाल सन 1622 में चली लेकिन वह पूर्णता असफल हो गया जब जहांगीर की मृत्यु सन 1627 में हुई तब शाहजहा ने अपने ससुर से कहा कि वह उन सभी का कत्ल करते जो इस सिंहासन के लिए उत्तराधिकारी बन सकते हैं और उस दौरान शाहजहां वहां पर मौजूद नहीं था तब तक उस सिंहासन पर दाबर बख़्श बैठाया गया और जब शाहजहां वापस आए तब उसने उसका कत्ल कर दिया जिस वजह से दाबर बख़्श को बलि का बकरा भी कहा जाता है| शाहजहां का अभिषेक सन 1628 में हुआ था और उसको अबुल मुजफ्फर शहाबुद्दीन तथा मोहब्बत साहिब किरण ए सानी उपाधि दी गई|

शाहजहां अपनी कौशल तथा बुद्धिमत्ता की वजह से 30 साल तक शासन और इस 30 सालों में वह सबसे अच्छा शासक कहलाया क्योंकि उसके साम्राज्य में किसी भी तरह की दुख तकलीफ और अन्य परेशानियां तारीख समय तक टिक नहीं पाती थी | शाहजहां स्थापत्य कला का अत्यधिक प्रेमिका जिस वजह से उसने आगरा में ताजमहल बनवाया वर्तमान समय में दुनिया का सातवां अजूबा माना जाता है क्योंकि उसकी सुंदरता कहीं और पर नहीं है|

वह पूरी तरह से संगमरमर के पत्थर से बना है और उस समय पत्थर संगमरमर का उत्पाद अत्यधिक हो रहा था जिस वजह से शाहजहां के शासनकाल को संगमरमर शासन काल के रूप में भी जाना जाता है| शाहजहां के दरबार को देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते थे और उसकी सुंदरता को देखकर वह आश्चर्यचकित उस दरबार की सराहना अत्यधिक किया करते थे |

शाहजहां ने सबसे पहले अहमदनगर पर सन 1633 में विजय प्राप्त करें और उसे अपने साम्राज्य में शामिल किया और अंबर ने निजामशाही सल्तनत के राजा को अपना बंधक बनाकर रखा था जिस वजह से वह वंशज भी पूरी तरह से समाप्त हो गया और वह राज्य भी मुगल साम्राज्य में शामिल हो गया| कई राजाओं के ऊपर आक्रमण करके और कई राजाओं को संधि द्वारा वह अपने मुगल साम्राज्य में शामिल किया और अपने साम्राज्य को बढ़ाता गया| सन 1636 में जब बीजापुर के शासक ने शाहजहां की संधि को स्वीकार नहीं किया तब सजाना उसके ऊपर दावा बोलकर उसे संधि मानने पर मजबूर कर दिया|

शाहजहां की 14 संतानों में से 7 संताने जीवित है जिसमें 4 लड़के और 3 लड़कियां थी और उसी समय शाहजहां का उत्तराधिकारी बनने के लिए सभी पूरी तरह से तैयार और कुशल थे जिस वजह से उत्तराधिकारी चुनने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था और उनकी लड़कियों ने एक एक लड़के को समर्थन दिया और जिसमें दारा को उत्तराधिकारी चुना गया क्योंकि जहां को लगता था कि वह सबसे कुशल है और उनको शाहबुलंद इकबाल की उपाधि दी गई जिस वजह से उन चारों भाइयों में उत्तराधिकारी बनने के लिए युद्ध छिड़ गया और उन सब ने एक दूसरे को परास्त किया और अंत में औरंगजेब बिजी रहे जिस वजह से शाहजहां के बाद औरंगजेब मुगल साम्राज्य के उत्तराधिकारी बने|

शाहजहां ने अपने शासनकाल में कई सारे कार्य किए हैं उन्होंने सजदा और पाया बॉस प्रथा को समाप्त किया | शाहजहां को जब ऐसा लगा कि पुर्तगालियों से उसे खतरा है तब उन्होंने आगरा के गिरिजाघर को तुड़वा दीया|

सन 1657 में शाहजहां को अत्यधिक तीव्रता से बुखार आया और उनकी हालत बेहद खराब हो गई जिस वजह से उनकी देखरेख रचने के लिए की प्रिय बेटी जिसका नाम जहांआरा था वह उनकी देखरेख के लिए उनके साथ ही रहा करती थी| शाहजहां 8 वर्षों तक अपने आगरा के किले में ही कैद था और उसकी उसकी आखिरी सांसे कई कठिनाइयों और समस्याओं इसमें व्यतीत हुई शाहजहां की मृत्यु 74 वर्ष की आयु में हुई और उनको उनके प्रिय बेगम के बगल में ताजमहल में दफनाया गया|

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निष्कर्ष

दोस्तों अभी हमने आपको इस ब्लॉग में बताया shah jahan history in hindi| अगर आपको यह पसंद आए हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यदि आपका कोई सवाल है तो आप कमेंट में पूछ सकते हैं |

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