श्रीनिवास रामानुजन जी के बारे में जानकारी 2021 | Srinivasa ramanujan biography in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में श्रीनिवास रामानुजन के बारे में बताने वाले हैं अर्थात आज का हमारा विषय है srinivasa ramanujan biography in hindi | रामानुजन का नाम हम सभी ने कभी ना कभी तो सुना होगा लेकिन उनके जीवन शैली एवं कार्यों के बारे में संपूर्ण जानकारी ना होने की वजह से गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि about srinivasa ramanujan in hindi , srinivasa ramanujan information in hindi इसलिए आज मैं आपको उनके बारे में बताऊंगा|

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श्रीनिवास रामानुजन जी के बारे में जानकारी | Srinivasa ramanujan biography in hindi | about srinivasa ramanujan in hindi

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श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को मद्रास नामक स्थान पर हुआ। रामानुजन के पिता का नाम श्री निवास अय्यर था एवं उनकी माता का नाम कोमल तम्मल था। रामानुजन के पिता एक साड़ी के दुकान पर क्लर्क का काम करते थे। तथा उनकी माता गृह लक्ष्मी थी जो कि वह घर में रहती थी।

और उन्होंने स्थानीय मंदिर में पूजा अर्चना करने के साथ साथ उन्होंने संगति में भी ज्यादा रुचि थी। रामानुजन को अपने माता-पिता से अधिक लगाव था।
रामानुजन ने अपनी अध्ययन की शुरुआत प्राथमिक स्कूल से ही कि।इसके बाद रामानुजन ने मार्च 1894 मे तमिल के मीडियम स्कूल में दाखिल करवाया । रामानुजन को गणित विषय से अत्याधिक लगाव था। परन्तु रामानुजन का मन पारंपरिक शिक्षा में नहीं लगता था।

रामानुजन ने १० साल कि उम्र में ही प्राइमरी परीक्षा में पुरे जिले में सबसे अधिक अंक से पास हुए। रामानुजन ने आगे की शिक्षा टाउन हाईस्कूल से प्राप्त की।

रामानुजन काफी होनहार और शांत स्वभाव के बालक थे। उन्हेअपने स्कूल में ही उच्च स्तर की गणित का अच्छा ज्ञान हो गया था।
रामानुजन को गणित और अंग्रेजी विषय पर अच्छे अंक प्राप्त हुआ। उन्ही वजह से रामानुजन को स्कॉलरशिप भी मिली थी।
रामानुजन धीरे धीरे गणित में इतना अत्यधिक रुचि हो गई कि उन्होंने अन्य विषयों को पढ़ना पसंद ही नहीं करते थे रामानुजन
को गणित में अच्छे अंक से पास हुए और अन्य सभी विषयों में फेल हो गए । हालांकि रामानुजन 12वीं में फेल हो गए।

रामानुजन को अपने जीवन में काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। रामानुजन के जीवन में एक समय ऐसा भी आया कि रामानुजन को गरीबी और बेरोजगारी का भी सामना करना पड़ा। रामानुजन ने छोटे छोटे बच्चों को ट्यूशन आदि पढ़ाकर अपना गुजर-बसर कर रहे थे। रामानुजन को गणित में शिक्षा हासिल करने के लिए उनको बहुत बड़ी चुनौती लगने लगी थी एक समय ऐसा भी आ गया था कि उनको भीख तक मांगने पड़ गई थी|
लेकिन इन हालातो मे श्रीनिवास रामानुजन ने अपनी हिम्मत नहीं हारी और रामानुजन ने गणित से संबंधित अपनी रिसर्च को जारी रखा इस दौरान रामानुजन को अपने कामो के लिए सड़कों पर गिरे हुए कागज उठा कर अपने काम में लगाने के लिए मजबूर हो गए,।

साल 1908 में रामानुजन की मां ने उनका विवाह जानकी नाम की लड़की से करवाया। रामानुजन ने अपनी शादीशुदा जिंदगी की जिम्मेदारी उठाने के लिए नौकरी की तलाश करने लगे। रामानुजन को 12वीं में अच्छे अंक से उत्तीर्ण नहीं हुए थे इन्हीं सब कारणो से उन्हें नौकरी नहीं मिली। इन्हें कारणों से रामानुजन ने अपने सेहत पर ध्यान नहीं दे रहे थे।
फिर कुछ दिनों के बाद रामानुजन ने कड़ी मेहनत और चुनौतियों के बाद अचानक उनकी मुलाकात वहां के डिप्टी कलेक्टर श्री वी. रामास्वामी अय्यर जी से हुई जो कि वे गणित के प्रखंड विद्वान भी थे। इसके बाद ही रामानुजन सारा जीवन ही बदल गया ।
अय्यर ने रामानुजन के गणित के बारे में उनकी प्रतिभा को पहचान लिया था ।और फिर रामानुजन को 25 रूपये मासिक देने केलिए फैसला किया।
रामानुजन ने मद्रास में पहला शोधपत्र “जर्नल ऑफ इंडियन मैथेमेटिकल सोसाइटी” में पद प्राप्त किया।

उसके बाद रामानुजन को साल 1912 में मद्रास के पोर्ट ट्रस्ट में क्लर्क की नौकरी प्राप्त हुई। नौकरी के साथ-साथ वे अपनी गणित के रिसर्च में और नए-नए सूत्रो कि भी खोज करने लगे। रामानुजन ने दिन पर दिन गणित पर एक से एक ने नए रिसर्च कर रहे थे। उसी समय रामानुजन को गणित संबंधी रिसर्च काम को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ी कठीनाई हो रही थी जिस वजह से अंग्रेजी गणितज्ञ की सहायता की जरूरत पड़ी। लेकिन उस
समय रामानुजन को भारतीय गणितज्ञ के अंग्रेजी वैज्ञानिकों के सामने अपनी अध्यानता को प्रस्तुत करने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

श्रीनिवास रामानुजन को गणित की एक विशेषज्ञ रिसर्च के लिए उन्हें कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने बी.ए. की पुरस्कार देकर उन्हें सम्मानित किया गया।
रामानुजन ने अपने करियर में सफलता के तरफ बढ़ रहे थे, तो इसलिए दूसरी तरफ रामानुजन ने अपने सेहत पर उनका ध्यान नहीं दे रहे थे
उस समय रामानुजन को टीबी रोग से पीड़ित थे।
इसके बाद वे अपनी अध्यान कल्पना शक्ति से गणित में एक से एक नए प्रयोग करते ग्रे।, इस कारण वे अपने जीवन में काफी सफलता प्राप्त कर रहे थे ।

लेकिन वही दूसरी तरफ रामानुजन का लगातार स्वाथ्य बिगड़ता जा रहा था उनही कारणो से रामानुजन के मार्ग में रुकावट पैदा हो रहा था। वहीं इसके बाद रामानुजनने डॉक्टरों की सलाह लेकर भारत वापस लौट कर चले आए और फिर अपने गांव मद्रास यूनिवर्सिटी में अध्यापन और रिसर्च के कामों को फिर से शुरू किया।

महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन काफी समय में बीमार रहने लगे थे, रामानुजन को टीबी रोग हो गया था , जिसकी कारण उनके स्वास्थ्य में लगातार बिगड़ती जा रही थी , रामानुजन का उम्र ३३ साल की थी। रामानुजन ने 26 अप्रैल, 1920 को अपनी अंतिम सांस ली।

रामानुजन ने अपने कॉलेज की कोई भी डिग्री हासिल नही की थी। रामानुजन ने गणित के काफी प्रचलित प्रमेयों को भी लिखा था लेकिन वे अपने कुछ सुश्रो को वे सिद्ध नही कर पाये थे। इंग्लैंड में हुए जातिवाद के कारण रामानुजन गवाह बने थेउनकी सफलता को देखते हुए 1729 को हार्डी-रामानुजन को सब लोग पहचानने लगे थे । 2014 में रामानुजन के जीवन पर आधारीत तमिल में उनकी एक फ़िल्म को बनने का तय किया गया और फिर वो फिल्म उनके ‘रामानुजन का जीवन’ पर बनाया गया |रामानुजन की 125 वीं एनिवर्सरी पर गूगल ने उन्हें बुला कर उनके बुद्धिमता को देखकर उनको सम्मानीत किया गया।

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निष्कर्ष

दोस्तों हमने आपको इस ब्लॉग में srinivasa ramanujan biography in hindi के बारे में बताया यदि आपका कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं और अन्य विषय के लिए आप हमें कमेंट कर सकते हैं हम आपके विषय पर आपको जानकारी अवश्य देंगे|

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