विक्रम बत्रा के बारे में जानकारी 2021 | Vikram batra biography in hindi

दोस्तों आज मैं आपको इस ब्लॉग में विक्रम बत्रा के बारे में बताने वाला हूं अर्थात आज का हमारा विषय है vikram batra biography in hindi। बहुत सारे लोगों ने आज तक इनका नाम भी नहीं सुना होगा और कुछ लोगों के इनके बारे में पता होगा इसलिए गूगल पर प्रतिदिन इस तरह के सर्च होते रहते हैं जैसे कि captain vikram batra biography in hindi , biography of vikram batra in hindi इसलिए मैं आपको इस ब्लॉग में उनके बारे में बताऊंगा ।

तो चलिए शुरू करते हैं

विक्रम बत्रा के बारे में जानकारी | Vikram batra biography in hindi | captain vikram batra biography in hindi

INFOGYANS

विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर 1974 में हमारे भारत राष्ट्र के हिमाचल प्रदेश राज्य के पालमपुर शहर में हुआ था इनके पिता का नाम जीएल बत्रा तथा इनकी माता का नाम कमल कांता बत्रा था इन दोनों दंपतियों को जुड़वा बच्चे पैदा हुए थे जिस वजह से इनकी माता इनका नाम लव कुश रखा क्योंकि वह श्री रामचरितमानस मैं बहुत विश्वास रखती थी। विक्रम का बचपन का नाम लव था इनका भाई विशाल जिनका नाम बचपन में कुछ था यह दोनों ही अपनी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी स्कूल तथा कुछ दिन पश्चात सेंट्रल स्कूल पालमपुर में अपना दाखिला कराया।

विक्रम बत्रा को बचपन से ही देश प्रेम प्रबल हो उठा था क्योंकि वह अपने पिता से देश प्रेम की कहानी सुना करते थे तथा सेना के अनुशासन को देखकर वह बहुत प्रभावित हुआ करते थे इस वजह से उन्होंने बचपन में ही सैनिक बनने का ठाना था। उस स्कूल में पढ़ने के पश्चात विक्रम बत्रा चंडीगढ़ चले गए और वहां पर उन्होंने डीएवी कॉलेज में विज्ञान विषय से स्नातक की पढ़ाई शुरू करें और इसी दौरान उन्होंने एनसीसी लिया था जिसमें उन्होंने सर्वश्रेष्ठ कैडेट चुना गया और गणतंत्र दिवस की परेड में भी भाग लिया विक्रम बत्रा को मर्चेंट नेवी से भी नौकरी मिल रही थी जो हांगकांग में है लेकिन विक्रम बत्रा ने उस नौकरी को ठुकरा दिया क्योंकि उन्होंने अपना पूरा मन बना लिया था कि उनको सेना में ही भर्ती होना है।

Vikram Batra पढ़ाई के साथ साथ डिफेंस सर्विस की परीक्षा में भी जुट गए थे लेकिन उन्होंने पार्ट टाइम नौकरी के रूप में ट्रैवल एजेंसी में 1 गए और वहां पर उन्होंने ब्रांच मैनेजर के रूप में कार्य किया और सन 1996 में सीडीएस की परीक्षा में उन्होंने उत्तीर्ण की और इलाहाबाद के सेवा चयन बोर्ड में उनका चयन हुआ और वहां पर 35 उम्मीदवारों का चुनाव हुआ था उसमें विक्रम बत्रा भी शामिल थे जिस वजह से उनके मन में देश प्रेम और बढ़ गया जिस वजह से उन्होंने अपने कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर भारतीय सैन्य अकैडमी में शामिल होना सही समझा।

विक्रम बत्रा ने माने कशा बटालियन आई एम ए में सन 1996 में शामिल हुए तथा उन्होंने अपने 19 महीने की ट्रेनिंग सन 1997 में पूरी करें और उसके बाद उन्होंने आइएमए में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। तत्पश्चात उनको हमारे भारत देश के मध्य प्रदेश राज्य के जबलपुर शहर में 1 महीने के प्रति परीक्षण के लिए भेजा गया उनको जम्मू और कश्मीर राइफल्स ने लेफ्टिनेंट के रूप में 13वीं बटालियन में शामिल किया गया था।

विक्रम बत्रा होली की छुट्टी में अपने घर वापस आए थे और उस समय उनकी मंगेतर डिंपल चीमा थी उसके पश्चात ही कारगिल का युद्ध छिड़ गया जिस वजह से कैप्टन विक्रम बत्रा को वापस युद्ध पर जाना पड़ा और उस समय उनकी मंगेतर ने उनसे कहा कि युद्ध के दौरान अपना ध्यान रखना लेकिन विक्रम बत्रा ने उनको जवाब में दिया या तो जीत का तिरंगा लहरा कर आऊंगा या उस तिरंगे में लिपटा हुआ आऊंगा।

सन 1999 के कारगिल युद्ध में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विक्रम बत्रा जब अपनी छुट्टियों को पूरा कर वापस सोपोर अपने बटालियन में शामिल हुए तब उनके बटालियन को उत्तर प्रदेश की तरफ जाने के लिए कहा गया विक्रम बत्रा अपनी बटालियन के साथ आठ माउंटेन डिवीजन के 192 माउंटेन ब्रिगेड के साथ आतंकवादियों का सफाया किया जिस वजह से उनको वहां से निकलने का आदेश दे दिया गया।

कश्मीर मैं जब कारगिल युद्ध छिड़ा उसके बाद वह अपने घर पर हर 10 दिन में फोन कर के बात किया करते थे लेकिन उनकी लास्ट कॉल सन सन 1999 में 26 जून को किया था और उन्होंने कॉल पर कहा कि मैं बिल्कुल ठीक हूं आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स 26 जून को दराज पहुंचे वहां पर 56 माउंटेन ब्रिगेड की कमान के स्वरूप उन को तैनात किया गया था और दो राजपूताना राइफल्स युद्ध के लिए रिजर्व के रूप में कार्य करने के लिए आदेश आया।

चोटी 4875 को कब्जे में लेने का अभियान शुरू किया गया जिसमें कैप्टन विक्रम बत्रा और उनके टुकड़ी इस जिम्मेदारी को संभाल रही थी और इनकी टुकड़ियों को सकरी चोटी में दुश्मनों का सफाया करने का आदेश दिया गया जिसमें दोनों और डराने थी और जो रास्ता था वहां पर शत्रुओं की भारी तादाद में नाकाबंदी लगी हुई थी। इसके बावजूद भी विक्रम बत्रा और उनके साथियों ने उन सभी आतंकवादियों को भारी गोलीबारी तथा बमबारी के बाद मौत के घाट उतारा और उन सत्रों का सफाया करके उन्होंने पॉइंट 4875 पर कब्जा कर लिया जिस वजह से वहां पर उनको एक नया नाम दिया गया जो था शेरशाह यह नाम उनको ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल वाई के जोशी।

विक्रम बत्रा के वीरगति प्राप्त करने के पश्चात उनको मर भारत सरकार की तरफ से 15 अगस्त 1999 में परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया विक्रम बत्रा के ऊपर दो फिल्में बनाई गई हैं एक्शन 2003 में तथा एक सन 2021 में बनाई गई सन 2003 में एलओसी कारगिल नाम की फिल्म बनाई गई थी जो अभिषेक बच्चन द्वारा कैप्टन बत्रा की भूमिका को निभाया था और सन 2021 में शेर शाह नाम की मूवी सिद्धार्थ मल्होत्रा ने विक्रम बत्रा का किरदार निभाया

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निष्कर्ष

जस्ट अभी हमने आपको इस ब्लॉग में बताया vikram batra biography in hindi। अगर आपको इनके बारे में जानकारी अच्छा लगा हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें और यदि आपका कोई सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते हैं हम आपके सवाल का जवाब अवश्य देंगे।

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